द फॉलोअप टीम, पटना:
बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय उर्फ रॉबिनहुड पांडेय ने आखिरकार बता ही दिया कि वो कथावाचक क्यों बने। दरअसल, बीते दिनों पूर्व डीजीपी की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हुई थी। उनका वीडियो भी वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में पूर्व डीजीपी कथा बांचते नजर आये थे। वो हनुमान चालीसा का पाठ करते और लोगों को जीवन का मर्म समझाते दिखे थे।
सोशल मीडिया में वायरल था कथावाचन का वीडियो
सोशल मीडिया में तस्वीर और वीडियो वायरल हुआ तो लोगों ने दिलचस्पी लेनी शुरू की। रॉबिनहुड पांडेय के नाम से लोकप्रिय पूर्व डीजीपी वैसे तो अपने बयानों और हरकतों को लेकर पहले भी चर्चा में रहे। लोगों ने जानना चाहा कि अब उन्होंने कौन सी नई लीला शुरू कर दी। खोजबीन शुरू हुई। मीडिया ने आखिरकार ढूंढ़ निकाला। पता चला कि गुप्तेश्वर पांडेय अब सच में जीवन की मोह-माया त्याग कर कथावाचक बन गये हैं। घूम-घूमकर लोगों को जीवन का रहस्य समझा रहे हैं। भगवान की भक्ति का तरीका बता रहे हैं। श्रीचरणों में स्थान पाने का मार्ग बता रहे हैं।
सियासी पिच से अचानक आध्यात्म की तरफ कैसे आये
समझ नहीं आ रहा था कि जो आदमी कुछ दिन पहले सियासी पारी खेलने की तैयारी कर रहा था। नौकरी से वीआरएस ले लिया था। एंग्री यंग मैन वाली छवि को चमकाने के लिए वीडियो अल्बम तक बना लिया था वो अचानक कथावाचक कैसे बन गया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि जिसे ताज की आस थी वो त्यागी हो गया। सवाल कई थे लेकिन जवाब किसी का भी नहीं। वैसे कई लोग व्यंग्य भी कस रहे थे कि चुनाव में टिकट मिला नहीं। आगे भी टिकट मिलने की उम्मीद नहीं थी। वैसे में पांडेय जी क्या करते। कथावाचक बनने के शांति तलाशने की कोशिश कर रहे होंगे।
अब खुद गुप्तेश्वर पांडेय ने बताई कथावाचन की वजह
खैर जितनी मुंह उतनी बातें। इन बातों पर क्यों भरोसा करना। चलिए अब तो गुप्तेश्वर पांडेय ने ही बता दिया है कि आखिरकार उन्होंने पहले पुलिस सेवा और फिर सियासत का रास्ता छोड़कर भक्ति का मार्ग क्यों चुन लिया। पूर्व डीजीपी ने रहस्य से पर्दा उठा ही दिया। कहा कि "एक समय ऐसा आता है कि जब आप जीवन का उद्देश्य जानना चाहते हैं। ईश्वर को जानना चाहते हैं। मैं कोई अपवाद नहीं हूं। मेरी दिलचस्पी अब भगवान में है। ये परिवर्तन अचानक नहीं हुआ।"
14 साल की उम्र से आध्यात्मिक हैं बिहार के पूर्व डीजीपी
पूर्व डीजीपी ने कहा कि "मैं जब 14 साल का था तब से ही हनुमान जयंती सहित अलग-अलग मौको पर लोगों को मंदिर में प्रवचन सुनाया करता था। आध्यात्म में मेरी शुरू से ही रूचि रही थी। इसमें नया कुछ भी नहीं है। सेवा अवधि में भी मैंने कई अनुष्ठानों में हिस्सा लिया लेकिन ड्युटी के दौरान कथा कहने की इजाजत नहीं थी इसलिए मैंने तब वैसा नहीं किया। मेरा मानना है कि ईश्वर के चरणों में जगह पाना इंसान का अंतिम लक्ष्य है। इसमें न्यूज जैसी कोई बात नहीं है। मीडिया को धन्यवाद कि उन्होंने मेरी निजी जिंदगी को जनता तक पहुंचाया"। बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि "हम सोचते हैं कि भौतिक उपलब्धियां हमें खुशी देंगी पर असली खुशी भगवान में है। मैं अब केवल भगवान की सेवा करना चाहता हूं"।
सुशांत सिंह राजपूत कथित आत्महत्या प्रकरण का मामला
गौरतलब है कि डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय सुशांत सिंह राजपूत कथित आत्महत्या वाले प्रकरण में सुर्खियों में आए थे। उस समय अपनी बयानबाजियों को लेकर उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के पहले उन्होंने वीआरएस लिया और नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में शामिल हो गए। उनके बक्सर साइड से चुनाव लड़ने की खूब चर्चा थी लेकिन टिकट नहीं मिला। हालांकि, गुप्तेश्वर पांडेय के साथ ऐसा पहले भी हो चुका था। साल 2009 में वो बक्सर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी में थे। तब भी पुलिस सेवा से वीआरएस लिया था लेकिन टिकट नहीं मिला।
2009 में भी पूर्व डीजीपी खेलना चाहते थे सियासी पारी
मूलरूप से बिहार के बक्सर जिला के रहने वाले गुप्तेश्वर पांडेय 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने एएसपी, एसपी, एसएसपी, आईजी और एडीजी जैसे पद संभाले। गुप्तेश्वर पांडेय ने अपने पूरे कार्यकाल में बिहार के 26 जिलों में पोस्टिंग संभाली। 2009 के चुनाव में बक्सर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए वीआरएश लिया लेकिन टिकट नहीं मिला। वापस पुलिस सेवा में आ गये। 2020 बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वीआरएस लिया लेकिन टिकट नहीं मिला। कभी बालू माफिया के खिलाफ रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार को गाली देकर तो कभी खुद की तारीफ में बने वीडियो अल्बम में एक्टिंग करके गुप्तेश्वर पांडेय ने खूब सुर्खियां बटोरीं।