द फॉलोअप टीम, पटना:
पटना के निजी हॉस्पिटल क्यूरिस में कांग्रेस के कद्दावर नेता सदानंद सिंह ने अंतिम सांस ली। पूर्व मंत्री लंबे समय से बीमार थे, उनके निधन पर बिहार और झारखंड में शोक की लहर है। वह लीवर सिरोसिस की बीमारी से जूझ रहे थे। दिल्ली के प्रसिद्ध डॉक्टर एसके सरीन ने उनका इलाज भी किया था। जिसके बाद वह पटना लौट गए। लेकिन फिर उनकी तकलीफ बढ़ गई तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुई। क्यूरिस हॉस्पिटल में दो महीने से उनका इलाज चल रहा था। लीवर सिरोसिस की परेशानी बढ़ते बढ़ते उनकी किडनी में भी इंफेक्शन हो गया था। मंगलवार को उनका डायलिसिस किया गया लेकिन वह डायलिसिस बर्दाश्त नहीं कर पाएं और बुधवार की सुबह नौ बजकर नौ मिनट उन्होंने अंतिम सांस ली।

लंबा राजनीतिक करियर रहा
सदानंद सिंह का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। पहली बार वह कहलगांव सीट से 1969 में विधायक बने थे। वह विधानसभा अध्यक्ष भी रहे थे। साथ ही बिहार सरकार के कई विभागों के मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। कहलगांव सीट से वह नौ बार विधायक रह चुके थे। 2020 विधानसभा चुनाव में उनकी जगह बेटे शुभानंद मुकेश ने चुनाव लड़ा था लेकिन वह भाजपा के पवन यादव से हार गए थे।

इन नेताओं ने जताया शोक
सदानंद सिंह की निधन पर सीएम नीतीश कुमार ने सदानंद सिंह के निधन पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने लिखा वे एक अनुभवी राजनेता थे। क्षेत्र के लोगों में भी काफी लोकप्रिय थे। 2000 से 2005 तक विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे थे। उनसे मेरा व्यक्तिगत संबंध था। उनके निधन से मर्माहत हूं। इधर पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने भी शोक जताते हुए लिखा सदानंद बाबू की कमी हमेशा खलेगी। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सदानंद सिंह जी के निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त करता हूं। उनका लंबा सामाजिक-राजनीतिक अनुभव रहा। वो एक कुशल राजनेता थे। इसके अलावा केंद्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह, जेडीयू नेता नीरज कुमार, रंजीत रंजन, उपेंद्र कुशवाहा ने भी ट्वीट कर शोक जताया।

जमीन से जुड़े थे
सदानंद सिंह की गिनती जमीनी नेताओं में होती थी। 1969 से 2015 तक लगातार 12 बार कहलगांव सीट से चुनाव लड़े थे नौ बार जीते। पार्टी में कुछ विवाद होने से 1985 में कहलगांव से निर्दलीय से चुनाव लड़ा था फिर भी वह जीते थे। एक बार वह लोकसभा का चुनाव लड़े। हालांकि, जीत नहीं मिली। 2015 विधानसभा चुनाव के बाद ही अंदाजा लग चुका था कि यह उनका आखिरी चुनाव होगा। उनके एक पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। शुभानंद राजनीति में एक्टिव हैं। तीन बेटियां सुचित्रा कुमारी, सुदिप्ता कुमारी और सुविजया कुमारी हैं।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी जताई शोक
इधर, सदानंद सिंह के निधन पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सह वित्त एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री झारखंड सरकार डॉ रामेश्वर उरांव के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोर नाथ शाहदेव एवं डॉ राजेश गुप्ता छोटू ने गहरी संवेदना एवं दुख प्रकट किया है।