द फॉलोअप टीम, गुमलाः
गुमला जिले के जंगल, डैम, विद्यालय और सरकारी कार्यालयों के परिसर स्थित पेड़ों पर एक हजार कृत्रिम घोंसले लगाये गये हैं । ऐसा इसलिए क्योकि यहां हर साल हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। गुमला का वातावरण ठंड का मौसम में पक्षियों के अनुकूल रहता है, इसलिए पर्याप्त भोजन व पानी मिलने से पक्षी यहां लगभग चार महीने तक आकर रहते हैं। वन विभाग गुमला हर साल पेड़ों पर कृत्रिम घोंसला लगाता है। इस साल घोंसले लगाने की योजना है।

माइनिंग क्षेत्रों में भी घोंसले लगेंगे
डीएफओ श्रीकांत ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा विलुप्त हो रही पक्षियों को बचाने के लिए पक्षी संरक्षण योजना बनायी जा रही है। लेकिन अभी योजना बनाने से ज्यादा जरूरी है कि उनकी सुरक्षा के उपाय खोजना। इसलिए विभागीय स्तर से पेड़ों पर घोंसला लगाये जा रहे हैं, ताकि पक्षियों का संरक्षण हो सके। इसबार तो माइनिंग क्षेत्रों में भी घोंसले लगाये जायेंगे। अब तक रेड भेंटेड बुलबुल, पाईड मैना, ब्लैक ड्रोंगो, स्केली ब्रस्टेड मुनिया, बगु, स्पोटेड डभ , गिद्ध, रेड क्रिस्टेड पोचार्ड, नॉर्थर्न सोवेलर व रूडी शेलडक जैसे नये पक्षियों का आ गये है।
पक्षियों का होता है शिकार
सरकारी स्तर से अब तक पक्षियों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कानून नही बना है, जिसका खामियाजा पक्षियों को भुगतना पड़ रहा है। लोग गुलेल व डंडे से मारकर, खानेवाली चीजों में दवा मिलाकर जाल बिछाकर पक्षियों का शिकार करते हैं। इससे पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं । ऐसे में उनकी सुरक्षा बहुत ही जरूरी है।