द फॉलोअप टीम, रांचीः
सांतवी से लेकर दसवीं जेपीएससी तक में हुई कथित गड़बड़ी को लेकर झारखंड में राजनीति गर्म है। एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। इसी बीच अखिल झारखंड छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष गौतम सिंह ने कहा कि एक ओर सीएम जेपीएससी पीटी परीक्षा परिणाम को क्लीन चीट देते हैं और दूसरी ओर रातों-रात आंदोलनरत अभ्यर्थियों को मोरहाबादी से ओरमांझी शिफ्ट कर देते हैं। अगर परीक्षा परिणाम में कोई त्रुटि नहीं है, तो अभ्यर्थियों को जवाब देने अब तक मुख्यमंत्री सामने क्यों नहीं आये? सदन में गोलमटोल बातें करने के बजाए मुख्यमंत्री सवालों का बिंदुवार जवाब देते।

उच्चस्तरीय जांच सुनिश्चित हो
जेपीएससी अभ्यर्थी न्याय वीडियो कैंपेन की जानकारी देते हुए गौतम सिंह ने कहा कि इस कैंपेन को जोरदार समर्थन मिल रहा है। राज्य के हर कोने से लोगों ने जेपीएससी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रारंभिक परीक्षा परिणाम में कई ऐसी त्रुटियां हैं, जिसने जेपीएससी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। निश्चित रुप से जेपीएससी पीटी परीक्षा का परिणाम संदेह के घेरे में आता है। अतः इसे रद्द करने के साथ-साथ इस पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच सुनिश्चित होनी चाहिए गौतम सिंह ने बिंदुवार तरीके से उन त्रुटियों के बारे में कहा है जिसपर इतना बवाल हो रहा है।

ये हैं वो त्रुटियां
• सामान्य वर्ग का कट ऑफ 260 अंक था, लेकिन 140 अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थी को भी पास किया गया।
• अनुसूचित जाति वर्ग का कट ऑफ 230 अंक निर्धारित था, लेकिन 128 अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थी को भी पास किया गया।
• कई ऐसे छात्र जिनके मार्क्स कट ऑफ अंक से ज्यादा थे, उन्हें फेल कर दिया गया।
• ओबीसी वर्ग का कट ऑफ 252 अंक था, लेकिन 230 अंक लाने वाले अभ्यर्थी को पास कर दिया गया।
• 49 अभ्यर्थियों का ओएमआर गुम कैसे हुआ, गुम होने के बावजूद अभ्यर्थियों को किस आधार पर पहले पास और फेल किया गया?