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राज्य भर के पिछड़ों को गोलबंद करेगा अखिल झारखंड पिछड़ा वर्ग महासभा, राज्यपाल को मांगों से अवगत करवाया

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द फॉलोअप टीम, रांची: 

अखिल झारखंड पिछड़ा वर्ग महासभा ने आज झारखंड के सभी 260 प्रखंडों में सामाजिक न्याय सभा एवं उपवास कार्यक्रम का आयोजन कर पिछड़ों को गोलबंद करते हुए स्मार-पत्र के माध्यम से राज्यपाल को अपनी मांगों से अवगत कराया।  पिछड़ों की बहुत बड़ी आबादी राज्य में है जबकि उनकी सामाजिक, शैक्षणिक तथा आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। इस वर्ग का सरकारी एवं अर्ध-सरकारी सेवा एवं पदों में प्रतिनिधित्व भी बहुत कम है। झारखंड में पिछड़ों को राष्ट्रीय मानक के आधार पर आरक्षण मिलना संवैधानिक अधिकार से जुड़ा मामला है। 

राज्यपाल से संगठन ने क्या मांग की
अखिल झारखंड पिछड़ा वर्ग महासभा प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल से झारखंड राज्य के सरकारी/गैर सरकारी नौकरियों तथा शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन में पिछड़ी जाति को राष्ट्रीय मानक के आधार पर आरक्षण देने के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर पहल करने की मांग की, जो निम्नवत है-

•  झारखंड राज्य के सरकारी/गैर सरकारी नौकरियों तथा शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन में पिछड़ी जाति को राष्ट्रीय मानक एवं झारखण्ड पिछड़ा वर्ग आयोग के अनुशंसा के आधार पर आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
• राज्य में जातिगत जनगणना सुनिश्चित की जाए।
• पिछड़ों के लिए भी आजीवन वैधता वाला जाति-प्रमाण पत्र निर्गत किया जाए।
• गैर सरकारी नौकरियों तथा शैक्षणिक संस्थानों में भी आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
• मनरेगा मजदूरी भुगतान में जाति आधारित भेदभाव रोका जाए।

कार्यक्रम के दौरान पिछड़ा वर्ग महासभा के सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने पिछड़ों की वर्तमान सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक एवं राजनैतिक स्थिति पर मंथन किया तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी के माध्यम से स्मार-पत्र को राज्यपाल तक पहुंचाकर पिछड़ों की मांगों को उनके समक्ष रखा। 

क्या हुआ वादों का, जवाब दें मुख्यमंत्री! 
अखिल झारखंड पिछड़ा वर्ग महासभा ने मुख्यमंत्री को चुनाव पूर्व किये वादों एवं मेनिफेस्टो का भी याद दिलाया तथा पिछड़ों के सवालों का जवाब देने आह्वान किया। ज्ञात हो कि वर्तमान सरकार ने चुनाव से पहले यह वादा किया था कि कैबिनेट की पहली बैठक में पिछड़ों के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार अपना 2 वर्ष पूर्ण करने जा रही तथा इन 2 वर्षों में कैबिनेट की दर्जनों बैठक हुई लेकिन इन विषय पर चर्चा तक नहीं हुई। इससे यह साबित हो चुका कि वर्तमान सरकार पिछड़ों के मुद्दों पर कितनी गंभीर है।