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मांझी के बाद अब हेमंत सोरेन ने बढ़ाई तेजस्वी की मुश्किलें, बिहार चुनाव में ठोका 12 सीटों पर दावा

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द फॉलोअप टीम-रांची-बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज है। सभी दल अपने-अपने संभावित उम्मीदवारों के नाम पर मंथन कर रहे हैं। सीटों को लेकेर दावेदारी का दौर भी चरम पर है। ऐसे में झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झामुमो ने भी बिहार चुनाव में अपनी दावेदारी पेश कर दी है। झामुमो ने 12 सीटों पर दावा ठोका है। झामुमो ने साफ कर दिया है कि इन 12 सीटों पर उतारे जाने वाले उम्मीदवारों के नाम भी करीब-करीब फाइनल हैं। लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या राजद झामुमो को गठबंधन के तहत इतनी सीटें देगा। झामुमो से जब इस बारे में सवाल पूछा गया तो उसने साफ कर दिया कि अगर गठबंधन के तहत उसे इतनी सीटें नहीं मिलती है तो फिर वो फैसला लेने को स्वतंत्र होगा। फैसला लेने को स्वतंत्र होने का यहां मतलब ये है कि झामुमो अकेले भी चुनाव लड़ सकता है। 
मांझी पहले से बना रहे हैं दबाव
महागठबंधन में सीटों को लेकर पहले से ही रार है। रालोसपा, वीआईपी के साथ-साथ सहयोगी दल ‘हम’ भी ज्यादा से ज्यादा सीटों को लेकर तेजस्वी पर दबाव बना रहा है। ‘हम’ सुप्रीमो जीतनराम मांझी ने तो ये तक कह दिया है कि अगर उनकी बातों को दरकिनार किया गया तो उन्हें अलग रास्ते पर चलने से भी गुरेज नहीं होगा। माना जा रहा है कि दो तीन दिनों में मांझी कोई बड़ा फैसला लेनेवाले भी हैं। ऐसे में झामुमो की दावेदारी ने तेजस्वी की पेशानी पर और बल ला दिया है। यकीनन तेजस्वी के लिए सबको खुश रखना आसान नहीं होगा। 
झारखंड में राजद को मिली थी 7 सीटें
झारखंड विधानसभा के चुनाव के दौरान राजद को सात सीटें दी गई थी। इनमें से सिर्फ एक सीट पर राजद के प्रत्याशी सत्यानंद भोक्ता विजयी हुए थे। अकेले जीतने के बावजूद भोक्ता को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। अब झामुमो तेजस्वी को याद दिला रहा है कि ये सिर्फ और सिर्फ लालू जी के प्रति हेमंत सोरेन का सम्मान है कि एक विधायक होने के बावजूद राजद को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। राजनीतिक पंडितों की माने तो एक तरह से सीएम हेमंत ने भी 12 सीटों पर दावेदारी पेश कर इमोशनल चाल चली है, जिसमें फिलहाल तेजस्वी फंसते नजर आ रहे हैं। क्योंकि उनके लिए सीधे तौर पर हेमंत की दावेदारी को खारिज करना आसान नहीं होगा। लेकिन मुश्किल ये भी है कि उतनी सीटें झामुमो को दी भी जाय तो आखिर कैसे ?पहले से ही एक-एक सीटों को लेकर माथापच्ची चल रही है।
जल्द ही होगी तेजस्वी से वार्ता
झामुमो के केन्द्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के मुताबिक फिलहाल गठबंधन को लेकर अनौपचारिक बातचीत चल रही है। जल्द ही साथी दलों की औपचारिक बैठक होगी, जिसमें झामुमो का प्रतिनिधि शामिल होगा। झारखंड मुक्ति मोर्चा की बिहार राज्य कमेटी के पदाधिकारी भी बुधवार को चुनावी रणनीति के मद्देनजर कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के साथ बैठक करने के लिए रांची आनेवाले हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शासन का मॉडल बिहार में लोकप्रिय है और इसका लाभ भी मिलेगा।
इन सीटों पर झामुमो की दावेदारी
12 सीटों पर झामुमों ने दावा ठोका है, उनमें झारखंड की सीमा से सटे तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, बांका, ठाकुरगंज, रूपौली, रामपुर, बनमनखी, जमालपुर, पीरपैंती और चकाई है। आपको बता दें कि 2005 के विधानसभा चुनाव में झामुमो के प्रत्याशी ने चकाई विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। 
अक्टूबर-नवंबर में होंगे चुनाव
विधानसभा के 243 सदस्यों का चुनाव करने के लिए बिहार विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2020 में होंगे। 2015 में चुने गए वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर 2020 को समाप्त होगा। माना जा रहा है कि इस बार चुनाव में जेडीयू के नेतृत्व वाले एनडीए और आरजेडी के नेतृत्व वाले यूपीए के बीच ही सीधा मुकाबला है। तीसरा मोर्चा भी खम ठोक रहा है लेकिन उसकी मौजूदगी कितनी होगी ये सवाल है ।
चुनाव चिह्न पर संशय
पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार में झामुमो का चुनाव चिह्न तीर-धनुष जदयू की आपत्ति को देखते हुए जब्त कर लिया गया था। संगठन ने चुनाव चिह्न की मान्यता के लिए फिर से निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया है।