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बतौर वैज्ञानिक डॉ. कलाम ने मिसाइल टेक्नोलॉजी में देश को विश्वस्तरीय बना दिया

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द फॉलोअप टीम, नई दिल्ली
डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम वह व्यक्ति थे, जो बनना तो पायलट चाहते थे, लेकिन किन्हीं कारणों से पायलट नहीं बन पाए। उन्होंने फिर भी हार नहीं मानी। जीवन ने उनके सामने जो रखा, उन्होंने उसे आसानी से स्वीकार कर लिया। उनका मानना था कि जीवन में यदि आप कुछ पाना चाहते हैं तो आपका बुलंद हौसला ही आपके काम आएगा। देश के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन के नाम से पहचाने जानेवाले एपीजे अब्दुल कलाम का 15 अक्टूबर यानी आज जन्मदिन है।

युवाओं के लिए बेहद प्रेरक हैं उनके विचार
बतौर वैज्ञानिक उन्होंने देश को मिसाइल टेक्नोलॉजी में विश्व स्तरीय बना दिया है। वहीं एक राष्ट्रपति के रूप में करोड़ों भारतवासियों को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा भी दी है। उनका निधन 27 जुलाई, 2015 में शिलॉन्ग में लेक्चर देते वक्त दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। देश उनके योगदान को हमेशा याद रखेगा। उनके विचार युवाओं के लिए बेहद प्रेरक रहे है। इस अवसर पर ऐसे ही कुछ विचारों को आइए अपने जीवन में उतारने की कोशिश करते हैं। भारत की बेमिसाल शख्सियत डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का सपना भारत को 2020 तक आर्थिक रूप से समृद्ध और शक्तिशाली देश बनाना था। जिसे उन्होंने अपने अंतिम समय तक पूरा करने का प्रयास किया। तमिलनाडु के रामेश्वरम कस्बे में, जैनुलाब्दीन (पिता) और आशियम्मा (माता) जी के घर 15 अक्तूबर 1931 को एक बालक ने जन्म लिया जो बड़े होने पर भारत के रत्न ' डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम' बने। आपके पिता ईमान, बुद्धि, उदारता और देश प्रेम से परिपूर्ण थे।

डॉ. कलाम के सपनों को सबने सराहा
डॉ. कलाम सपनों को सच करने में यकीन रखते थे। उनके सपनों को सराहा प्रो.विक्रम साराभाई, प्रो. सतीश धवन और डॉ. ब्रम्हप्रकाश जैसे महान वैज्ञानिकों ने, जिनकी प्रेरणा और ज्ञान के बल पर आप हमेशा सराबोर रहें। उनके सपनों को पंख देना, ताकि वो अपनी उड़ान से भारत को नई बुलंदियों पर ले जाए, उनकी खुली आंखों का सपना था। कलाम साहब की ऐसी असंख्य खूबियां उन्हें बच्चों के पसंदीदा शिक्षक और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बनाती है। 

जीवन को बेहतरीन लर्नर के रूप में ढाला  
डॉ. कलाम का सफर रामेश्वरम से शुरू हुआ। वे भारत के राष्ट्रपति भी बने, लेकिन उनकी पहली पसंद एक टीचर के रूप में ही रही। उन्होंने अपने जीवन को एक बेहतरीन लर्नर के रूप में ढाला। दुनिया के इस बेमिसाल टीचर ने 27 जुलाई 2015 को अपने देश की युवापीढ़ी के सामने दुनिया से अलविदा कह दिया।

देश की यादगार धरोहर 
डा. कलाम साहब के जीवन के वो आखिरी पल देश की यादगार धरोहर की तरह कैमरे में कैद हो गए। डा. कलाम साहब का सपना था भारत को 2020 तक आत्मनिर्भर भारत के रूप में वैश्विक पहचान बनते हुए देखना। जिसे अपनी आनेवाली नई पीढ़ी को थमा कर चल दिए कलाम साहब। 

स्वदेशी गाइडेड मिसाइल डिजाइन किया 
1980 में जब रोहिणी उपग्रह भारत का पहला स्वदेश-निर्मित प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बना, डा. कलाम साहब बेहद खुश थे। यह देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत कदम था। भारत अन्तरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया। डॉ. कलाम भारत को टेक्नोलॉजी की दुनिया में आत्मनिर्भर बनाने की इबारत लिखने की तैयारियों में जुट गए। डा. कलाम ने स्वदेशी गाइडेड मिसाइल को डिजाइन किया। भारतीय तकनीक से पृथ्वी और अग्नि जैसी मिसाइलों को बनाया। भारत की सरजमीं से बेइंतहा मोहब्बत करने वाले भारत के इस होनहार बेटे ने भारत की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए कई सफल प्रयोग किए।

बच्चों से बेशुमार प्यार था
दुनिया जानती है कि डा. कलाम ने शादी नहीं की, उनकी कोई औलाद नहीं थी। लेकिन उनका बच्चों से प्रेम बेशुमार था। एक बार उनसे किसी विदेशी पत्रकार ने ऐसा ही सवाल पूछा, कि आपकी कोई संतान नहीं है, फिर भी आप बच्चों से इतना प्यार करते हैं क्यों? कलाम साहब मुस्कुराए और बडी शालीनता से बोले, मेरे तीन बच्चे हैं पृथ्वी, अग्नि और ब्रहमोस। यकीनन राष्ट्रप्रेम और भारत को दुनिया के मानचित्र में विकसित देशों की श्रेणी में लाने का उनका प्रयास ही उनका वास्तविक प्रेम था। जिसके परिणाम स्वरूप भारत के करोड़ों बच्चों की आज भी कलाम साहब पहली पसंद हैं।

'आग का सुनहरा तिलक है'
लगभग पांच वर्षो के अथक परिश्रम के फलस्वरूप जब ’अग्नि’ मिसाइल का सफल परीक्षण हुआ। तब डॉ कलाम कहते हैं कि ’अग्नि को इस नजर से मत देखो ये सिर्फ ऊपर उठने का साधन नहीं है, न शक्ति की नुमाइश है, अग्नि एक लौ है जो हर हिन्दुस्तानी के दिलों में जल रही है। इसे मिसाइल मत समझो! यह कौम के माथे पर चमकता हुआ आग का सुनहरा तिलक है।

स्वभाव की सौम्यता में कमी नहीं आयी
डॉ. कलाम ने एक के बाद एक कई सशक्त सुरक्षा के हथियारों मिसाइल से लेकर परमाणु परीक्षण तक में भारत को दुनिया के परमाणु सम्पन्न देशों की श्रेणी में लाने का सफल प्रयास किया। लेकिन उनके स्वभाव की सौम्यता इन हथियारों को आधुनिक तकनीक के साथ विकास से जोडकर देखती है। भारत हमेशा से शान्तिप्रिय देश है, दुनिया को यह बेहतर तरीके से समझाने का काम किया कलाम साहब ने।

कई ज्ञानवर्द्धक किताबों की रचना की
डॉ कलाम ने अपनी बेशकीमती धरोहर के रूप में देश को कई पुस्तकें समर्पित की- इंडिया 2020 ए विजन फॅार द न्यू मिलेनियम, माई जर्नी तथा इग्नाटिड माइंड्स-अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया,  विंग्स ऑफ फायर, एनविजनिंग अन एमपावर्ड नेशन : टेक्नालॉजी फार सोसाइटल ट्रांसफारमेशन आदि पुस्तकें शामिल हैं।   

क्रूज मिसाइल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान 
 डॉ. कलाम ने सितंबर 1985 में त्रिशूल, फरवरी 1988 में पृथ्वी, मई 1989 में रूस के साथ मिलकर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. कलाम के इस जज्बे को सलाम करते हुए देश उन्हें मिसाइल मैन के नाम से संबोधित करता है। डॉ. कलाम को 1981 में भारत सरकार ने पद्म भूषण, 1990 में पदम् विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया। 

'नौजवानों को नई दिशा की जरूरत' 
डॉ. कलाम का कहना था कि ’मेरे ख्याल से मेरे वतन के नौजवानों को एक साफ नज़रिए और दिशा की जरूरत है। वो भारत को वैश्विक परिदृश्य में विकसित देशों की श्रेणी में देखना चाहते थे। वो कहते थे ’काश! हर हिंदुस्तानी के दिल में जलती हुई लौ को पंख लग जाए और उस लौ की परवाज़ से सारा आसमान रौशन हो जाए।’ कलाम साहब की बेमिसाल शख़्सियत भारत के हर नौजवान की वास्तविक धरोहर है, जिसे वो सदियों सहेज के रखने का प्रयास करेगा।