द फॉलोअप टीम :
लोकसभा में मणिपुर हिंसा पर केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो गई। चर्चा की शुरुआत कांग्रेसी सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि मणिपुर का युवा, वहां की बेटी, किसान, छात्र आज इंसाफ मांगते है। मार्टिन लूथर किंग ने कहा है कि कहीं भी नाइंसाफी हो तो वो हर जगह इंसाफ के लिए खतरा बन सकता है। ये ना समझें की उत्तर-पूर्व में हो रहा है, ये भारत में हो रहा है। अगर मणिपुर में आग लगी, वो विभाजित हुआ तो भारत में आग लगी, भारत विभाजित हुआ। देश के मुखिया होने के नाते पीएम सदन में आएं, अपनी बात रखें। सभी पार्टियां समर्थन दें, संवेदना दें और हम ये संदेश दें कि मणिपुर पर हम सभी साथ हैं। अफसोस की बात है कि ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने मौन व्रत लिया कि ना लोकसभा में बोलेंगे, ना राज्यसभा में बोलेंगे। इसलिए मजबूरी में अविश्वास प्रस्ताव लाए। सरकार की ओर से जवाब देने वाले पहले मेंबर निशिकांत दुबे होंगे।

गौरव गोगोई ने पूछे तीन सवाल
अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में बोलते हुए गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तीन सवाल पूछे हैं. पहला सवाल ये पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर क्यों नहीं गए। राहुल गए, कठऊकअ अलायंस के सांसद गए, गृहमंत्री गए। दूसरा सवाल ये कि 80 दिन क्यों लगे मणिपुर पर बोलने में। बोले तो सिर्फ 30 सेकंड बोले। आज तक संवेदना का कोई शब्द व्यक्त नहीं किया। प्रधानमंत्री होने के नाते उनके शब्दों का जो महत्व है, वो किसी मंत्री के शब्दों में नहीं है। शांति के कदम की शुरुआत ढट करें तो वो अच्छा है, मंत्री के कदम में ये ताकत नहीं। और तीसरा सवाल ये पूछा कि मणिपुर के मंत्री को बर्खास्त क्यों नहीं किया। गुजरात में जब राजनीति करनी थी तो एक बार नहीं दो बार सीएम बदले। उत्तराखंड में 3 बार बदला, त्रिपुरा में बदला। मणिपुर के सीएम को क्या विशेष आशीर्वाद है, जो खुद स्वीकार कर रहे हैं कि इंटेलीजेंस फेलियर हुआ।
