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संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक किया काम, CEC ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों पर चुनाव आयोग का जवाब

संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक किया काम, CEC ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों पर चुनाव आयोग का जवाब

द फॉलोअप डेस्क:

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगे मनमानी के आरोपों पर चुनाव आयोग का जवाब आ गया है। भारतीय निर्वाचन आयोग के डिप्टी डायरेक्टर पी पवन ने प्रेस रिलीज जारी करके जवाब दिया है। दरअसल, रिपोर्ट में यह कहा गया है कि पिछले 10 महीने में 14 बार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा लिए गये फैसलों पर आपत्ति जताई है। आरोप लगाया है कि महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उनसे सलाह-मशवरा नहीं किया गया। इन फैसलों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं का नाम सूची से हटाना और नए मतदाताओं को जोड़ना भी शामिल है। 

 

संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत होता है काम
चुनाव आयोग के उप-निदेशक पी पवन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के सख्त निर्देशों के तहत काम करता है। आयोग एक बहुसदस्यीय और सामूहिक संवैधानिक संस्था के रूप में कार्य करता है। लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-परख सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य पूरी पारदर्शिता, कानून का पालन और कामकाज में अनुशासन सुनिश्चित करना है। आयोग के सभी कार्य कानूनों और आयोग के निर्देशों के अनुसार किए जाते हैं।

आपत्ति या सवाल सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया
पी पवन ने कहा कि आयोग की ओर से जारी सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश पूरी तरह कानूनी रूप से मान्य होते हैं। इनका पालन मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 में निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत किया जाता है। मसौदा तैयार करने के दौरान आयोग के सदस्यों की ओर से उठाए गए किसी भी कामकाजी सवाल या दिए गए सुझाव, मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से अपनाई जाने वाली सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयुक्तों की ओर से दिए गए सुझावों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं को और बेहतर बनाना था।

तीनों निर्वाचन आयुक्त नहीं, प्रत्येक अधिकारी शामिल
उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग विचार और टिप्पणियां आना सामान्य बात है। ये अंतिम फैसला लिए जाने से पहले निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं। केवल तीनों निर्वाचन आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनाव प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह अधिकृत है। पिछले 10 महीनों की कुछ चुनिंदा आंतरिक टिप्पणियों और विचारों को सामने लाना, जबकि मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों के बड़े हिस्से को नजरअंदाज करना, पूरी तस्वीर नहीं दिखाता है।

आयोग ने देशभर में 40 नई पहल की है
हाल के महीनों में आयोग ने देशभर में कई निर्देश जारी किए हैं, लगभग 40 नई पहल की हैं और मतदाता सूची में संशोधन सहित कई चुनावी सुधार किए हैं। इन सभी फैसलों को पिछले एक साल में पूरे आयोग ने मिलकर लिया है। आयोग ने हाल ही में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में प्रमुख चुनाव और चुनाव से संबंधित प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी की हैं। इस काम में बड़े स्तर पर प्रशासनिक और कामकाजी व्यवस्था के साथ-साथ आयोग की कई मंजूरियां और निर्देश शामिल थे।

चुनाव आयोग का डाटाबेस पूरी तरह सुरक्षित है
आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म, जैसे ECI Net, अनधिकृत बदलाव और छेड़छाड़ को रोकने के लिए सख्त डेटा सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत काम करते हैं। राष्ट्रीय डेटाबेस में आईटी सुरक्षा जांच और ऑडिट की व्यवस्था सामान्य साइबर सुरक्षा उपायों का हिस्सा है। कानून के तहत मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ERO) और जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) सहित वैधानिक अधिकारियों को मतदाताओं के पंजीकरण और नाम हटाने का अधिकार दिया गया है।

भारत निर्वाचन आयोग पूरी ईमानदारी के साथ अपने संवैधानिक दायित्वों को निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आयोग लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को समझता है।

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