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असम : सदियों पुराने दारिका सिलसाकू की होगी विरासत वाली मरम्मत, चूना-गुड़ से तैयार होगा खास मसाला

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द फॉलोअप डेस्क 

सिमालुगुरी में ऐतिहासिक दारिका सिलसाकू के संरक्षण का एक विस्तृत काम शुरू होने वाला है। पुरातत्वविद बाढ़ से क्षतिग्रस्त इस स्मारक को पारंपरिक पत्थर की चिनाई और सदियों पुराने मसाले (मोर्टार) के नुस्खे का इस्तेमाल करके फिर से ठीक करेंगे। इस मसाले में चूना, ईंट का चूरा (सुर्खी), गुड़, बेल का गोंद, मेथी, सफेद कत्था और हरड़ (हरीतकी) का इस्तेमाल किया जाएगा। इस योजना का मकसद सिर्फ़ प्राचीन पुल की मरम्मत करना नहीं है, बल्कि जहाँ तक हो सके, इसके मूल स्वरूप और ऐतिहासिक बनावट को भी बचाए रखना है। हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ में पुल को काफी नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद राज्य के पुरातत्वविदों ने जीर्णोद्धार की एक विस्तृत योजना तैयार की है। संरक्षण प्रक्रिया में वैज्ञानिक तरीके से मलबा हटाना, केमिकल से सफाई और क्षतिग्रस्त हिस्सों को सावधानीपूर्वक अलग करना शामिल होगा। 

 चूने के कंक्रीट और मसाले को भी नुकसान पहुंचा था

बाढ़ में ऐतिहासिक पुल के बहाव की दिशा में बने दो खंभे (पियर्स) क्षतिग्रस्त हो गए थे। तेज़ बहाव और पानी के कटाव के कारण प्राचीन पत्थर की चिनाई बह गई थी। पानी में डूबे हिस्सों के चूने के प्लास्टर, चूने के कंक्रीट और मसाले को भी नुकसान पहुँचा था, साथ ही संरचना के कुछ हिस्सों पर काई भी जम गई थी। तत्काल सुरक्षा उपायों के तहत, पुरातत्वविद गाद हटाने और मिट्टी का काम (अर्थवर्क), बांस की बाड़ लगाने और कॉफ़र डैम बनाने का काम करेंगे। मचान (scaffolding) भी लगाया जाएगा और जीर्णोद्धार शुरू होने से पहले पूरे पुल का विस्तृत दस्तावेज़ीकरण किया जाएगा, जिसमें टूटे हुए पत्थर, मसाला और कंक्रीट शामिल होंगे।

पारंपरिक पत्थर की चिनाई का इस्तेमाल

संरक्षण कार्यक्रम में ऊपरी हिस्से (सुपरस्ट्रक्चर) पर चूने-सुर्खी के प्लास्टर को ठीक करना, पहुंच मार्ग (approach road) को बेहतर बनाना और पारंपरिक पत्थर की चिनाई का इस्तेमाल करके विंग वॉल्स (wing walls) का निर्माण करना भी शामिल होगा। इस संरक्षण परियोजना की सबसे खास बातों में से एक है पारंपरिक सामग्री और तरीकों का इस्तेमाल करके मसाला तैयार करना। माना जाता है कि सदियों पहले पुल के मूल निर्माण में इन्हीं का इस्तेमाल किया गया था। इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री में बिना बुझा या बुझा हुआ चूना, ईंट का चूरा (सुर्खी), रेत, गुड़ (चिपकाने के लिए), बेल के फल से बना गोंद (चिपकाने के लिए), मेथी (बनावट के लिए), सफेद कत्था (बनावट के लिए) और हरड़ (हरीतकी) शामिल हैं।

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Tags - Darika Silsaku Simaluguri Heritage Conservation Traditional Mortar Archaeological Restoration