डेस्क:
पंजाब में सियासी घटनाक्रम में तेजी से बदल रहा है। पार्टी में अनुशासनहीनता को लेकर आलोचना का सामने कर रहे पूर्व काग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू सोमवार को भगवंत मान से मुलाकात करने वाले हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान से सिद्धू की मुलाकात को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा है कि वो अपने राजनीतिक विकल्प की खोज में हैं।
दरअसल, मुलाकात ऐसे वक्त में हो रही है जब दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक होने वाली है। इसमें राजस्थान के जयपुर में आयोजित हुई चिंतन शिविर के एजेंडे को अंतिम रूप दिया जायेगा।

नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट कर दी जानकारी
गौरतलब है कि रविवार को नवजोत सिंह सिद्धू ने एक ट्वीट किया था। लिखा था कि पंजाब की अर्तव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए चंडीगढ़ में कल शाम को मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाका करूंगा। पंजब का पुनरुत्थान एक ईमानदार सामूहिक प्रयास से ही संभव है। कहा जा रहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस में खोते विश्वास की वजह से अन्य राजनीतिक विकल्पों की तलाश में है। हो सकता है कि वो आम आदमी पार्टी के साथ जाएं या फिर तीसरा मोर्चा का गठन करें।
Will meet CM @BhagwantMann tomorrow at 5:15 PM in Chandigarh to discuss matters regarding the revival of Punjab’s economy . . . Punjab’s Resurrection is only possible with an honest collective effort . . .
— Navjot Singh Sidhu (@sherryontopp) May 8, 2022
सिद्धू की गतिविधियों से नाराज हैं कई शीर्ष नेता
कहा जाता है कि नवजोत सिंह सिद्धू की राजनैतिक गतिविधियों तथा बयानों की वजह से पंजाब कांग्रेस के कई नेता असंतुष्ट हैं और असहज स्थिति का सामना करते हैं। मौजूदा पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष हरीश चौधरी ने तो बकायदा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से सिद्धू के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। कहा है कि चुनाव के दरम्यान और चुनाव बाद भी सिद्धू लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं। ऐसे बयान दिए हैं जिसकी वजह से पार्टी को नुकसान हुआ।
चुनाव बाद सोनिया गांधी ने मांग लिया था इस्तीफा
दरअसल, नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब में मुख्यमंत्री बनने की महात्वाकांक्षा रखते थे। उन्होंने चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। लगातार सरकार के फैसलों पर सवाल उठाते थे। चुनाव से ऐन पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सीएम पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया।
सिद्धू को उम्मीद थी कि उनको मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। चुनाव में भी वही सीएम पद का चेहरा होंगे लेकिन पार्टी ने चरणजीत सिंह चन्नी पर भरोसा जताया। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते सिद्धू के हाथ में चुनाव की कमान थी लेकिन पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी।