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पति को खर्चे के लिए हर महीने इतने हजार दो, जानिए अदालत ने पत्नी को क्यों दिया ये आदेश 

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द फॉलोअप डेस्क 

अदालत ने पत्नी को आदेश जारी कर कहा कि वो अपने पति को हर महीने गुजारा के लिए 5000 रुपये दे। मामला उज्जैन का है। अदालत ने ये फैसला तलाक की एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुनाया है। अदालत ने कहा कि पत्नी अपने पति से तभी अलग रह सकती है जब वो अपने को हर महीने खर्च के लिए 5000 रुपये देगी। तलाक का ये मामला उज्जैन की फैमिली कोर्ट में चल रहा है। मिली खबर के मुताबिक पत्नी ब्यूटी पार्लर चलाती है औऱ पति बेरोजगार है। पति ने सिर्फ 10वीं तक की पढ़ाई की है। पति का नाम अमन कुमार और पत्नी का नाम नंदिनी बताया गया है। 

क्या है पूरा मामला 

अमन कुमार ने अदालत को बताया कि नंदिनी से उसकी मुलाकात 2020 में एक समारोह में हुई थी। नंदिनी ने उसे प्रपोज किया। उस समय अमन उससे से विवाह नहीं करना चाहता था क्योंकि वो पढ़ाई कर रहा था। लेकिन नंदिनी ने आत्महत्या करने की धमकी दी। जिससे वो विवाह के लिए तैयार हो गया। दोनों बिना घर वालों को सूचना दिये शादी कर ली और इंदौर में आकर रहने लगे। अमन ने आरोप लगाया कि इसके बाद नंदिनी के घरवालों ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया। साथ ही उसे पढ़ाई करने से रोक कर कुछ करने के लिए दबाव बनाया जाने लगा। इससे तंग आकर वो नंदिनी को छोड़कर अपने घर वापस लौट गया। 

नंदिनी ने फिर ये किया 

नंदिनी ने इसके बाद पुलिस में अमन के लापता होने की रपट लिखाई। जवाब में अमन ने भी मानसिक प्रताड़ना का हवाला देकर अदालत में तलाक के लिए अर्जी दाखिल कर दी। बात बढ़ने पर नंदिनी ने उस पर हिंसा करने का आऱोप लगाया। साथ ही दोनों तलाक पर राजी हो गये। अब अदालत ने नंदिनी को अमन को पांच हजार रुपये हर माह देने का फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नंदिनी ने अपने बारे में गलत सूचना दी कि वो बेरोजगार है। जबकि वास्तव में अमन बेरोजगार है। इसलिए नंदिनी अब अमन को हर माह गुजारा के लिए रकम देगी।  

 

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