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आसनसोल में रोड रेज ने ली एक और जान, बेटे और पत्नी के सामने पिता की हत्या; 3 गिरफ्तार

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आसनसोल
आसनसोल में शनिवार रात देवदीप चटर्जी की हत्या कर दी गई थी. यह घटना चित्तरंजन के नेशनल हॉकी खिलाड़ी एरिक लकड़ा हत्याकांड की भयावह यादें ताजा करती है. जहां एक मामूली विवाद मौत का सबब बन गई. घटना आसनसोल दक्षिण थाना क्षेत्र की है. आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के DCP सेंट्रल ध्रुव दास ने पुष्टि की है कि हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है. मुख्य आरोपी रविउल आलम और शुभोजीत मंडल सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने स्पष्ट किया कि आरोपियों का किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है. आसनसोल, जो वर्तमान में बॉलीवुड अभिनेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का संसदीय क्षेत्र है, वहां बढ़ते 'रोड रेज' के मामले सुरक्षा पर बड़े सवालिया निशान लगा रहे हैं. आज देवदीप चटर्जी के शव का पोस्टमार्टम आसनसोल जिला अस्पताल में किया जाएगा. 
मामूली विवाद ने लिए खूनी रूप
जानकारी के अनुसार, देवदीप चटर्जी शनिवार रात अपनी पत्नी पियली और छठी कक्षा में पढ़ने वाले बेटे के साथ एक निजी कार्यक्रम से घर लौट रहे थे. इस दौरान भगत सिंह मोड़ के पास उनकी शुभोजीत मंडल के साथ उनकी हल्की कहासुनी हुई. बात यहीं खत्म हो सकती थी, लेकिन अपराधी प्रवृति के युवकों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया. ​रेलवे टनल के पास दूसरे आरोपी रविउल आलम ने अपनी बाइक से देवदीप का रास्ता रोका और मारपीट की. आरोपी देवदीप का पीछा करते हुए उनके निवास, नव अनन्या हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के गेट तक पहुंच गए और वहां उन पर जानलेवा हमला कर दिया.
​सीसीटीवी में कैद हुई रूह कंपाने वाली दरिंदगी
घटना का सीसीटीवी फुटेज रोंगटे खड़े कर देने वाला है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हमलावर देवदीप को जमीन पर पटककर बेरहमी से पीट रहे हैं. सबसे हृदयविदारक दृश्य वह था, जब देवदीप की पत्नी और उनका छोटा बच्चा हमलावरों के सामने हाथ जोड़कर अपने पति और पिता की जान की भीख मांग रहे थे. हमले के बाद देवदीप बेसुध हो गए. अगली दोपहर जब उनकी स्थिति बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
नशेड़ियों पर क्यों नहीं लग रहा अंकुश
इस हत्याकांड ने प्रशासन और समाज, दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. कॉम्प्लेक्स के गेट पर सुरक्षाकर्मी तैनात थे, लेकिन उन्होंने न तो गेट खोला और न ही देवदीप को बचाने की हिम्मत दिखाई. आरोप है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने तत्परता दिखाने के बजाय लापरवाही बरती. यदि पुलिस उसी वक्त देवदीप को अस्पताल पहुंचाने का प्रबंध करती, तो शायद देव्दीप आज जिंदा होते. आम नागरिकों का सवाल है कि रात के 2 बजे तक शराब के नशे में धुत होकर सड़कों पर आतंक मचाने वाले बाइकर्स पर पुलिस का अंकुश क्यों नहीं है?

 

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