द फॉलोअप डेस्क:
जगह राष्ट्रपति भवन। मौका सैन्य सम्मानों के वितरण का। एक ओर शहीद सैनिक की मां है तो दूसरी ओर भारतीय सेना की सुप्रीम लीडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू। सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर को मरणोपरांत कीर्ति चक्र मिला। कीर्ति चक्र लेते हुए दिवंगत सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर की मां भावुक हो गईं और राष्ट्रपति से लिपटकर रो पड़ीं। राष्ट्रपति ने भी उन्हें गले लगाकर ढांढ़स बंधाया। राष्ट्रपति भवन का प्रोटोकॉल कहता है कि राष्ट्रपति से गले लगना तो दूर, आप हाथ भी नहीं मिला सकते। राष्ट्रपति का पैर तक छूना मना है, लेकिन ममता कहां प्रोटोकॉल समझती है।
इस तस्वीर को प्रोटोकॉल से परे जाकर देखिए, तो दोनों तरफ मां ही है ना। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अतीत में अपने 2 जवान बेटों को खोया है और बड़ी मुश्किल से जीवन के उस झंझावात से उबरी हैं। जब, शहीद बेटे का कीर्ति चक्र लेते हुए एक मां भावुक हो गईं, तो दूसरी ओर उन्हें प्रोटोकॉल तोड़कर गले लगाने वाली शख्सियत भी तब राष्ट्रपति नहीं, केवल मां थीं।
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— Prayag (@theprayagtiwari) June 8, 2026
6 जुलाई 2024 को दी थी शहादत
गौरतलब है कि 6 जुलाई 2024 को जम्मू कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों के खिलाफ लड़ते हुए सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। मुठभेड़ के दौरान उन्हें सिर में गोली लगी थी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जंजाल प्रवीण प्रभाकर अंत तक लड़े और देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिया। शहादत से पहले सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर ने 2 आतंकवादियों को मार गिराया। उनके अदम्य साहस, वीरता और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति ने गले लगाकर ढांढ़स बंधाया
राष्ट्रपति भवन में शहीद बेटे का कीर्ति चक्र ग्रहण करते हुए सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर की मां शालू प्रभाकर जंजाल भावुक हो गईं और राष्ट्रपति से लिपटकर रो पड़ीं। बाद में राष्ट्रपति भवन की महिला कर्मियों ने शहीद जवान की मां को संभाला। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी भावुक हो गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आंखे भी नम हो गईं।