द फॉलोअप डेस्क
डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी जामताड़ा प्रखंड का कटंगी गांव जल संकट की तस्वीर पेश कर रहा है। जिला समाहरणालय से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस गांव में करीब 400 की आबादी आज भी दूषित पानी पीने को विवश है। विडंबना यह है कि जिस समाहरणालय में जिले के उपायुक्त DC समेत तमाम आला अधिकारी बैठते हैं, वहां से चंद कदमों की दूरी पर ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
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गांव की कुल आबादी के लिए कहने को तो आठ चापाकल हैं, लेकिन इनमें से पांच लंबे समय से खराब पड़े हैं। ग्रामीणों के लिए राहत की एकमात्र उम्मीद यहां लगा 'सोलर वाटर प्लांट' था, जो पिछले 5 महीनों से बंद पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, जब यह प्लांट चालू था, तब 50-60 घरों को शुद्ध पेयजल मिल पा रहा था, लेकिन अब यह हाथी का दांत साबित हो रहा है।
पानी की किल्लत का सबसे ज्यादा असर गांव की महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें दैनिक कार्यों और पीने के पानी के लिए करीब 1 किलोमीटर दूर नदी या तालाब तक जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार विभाग से इसकी शिकायत की, लेकिन नतीजा सिफर रहा। थक-हारकर ग्रामीण कभी-कभी चंदा इकट्ठा कर चापाकल की मरम्मत खुद करवाते हैं, पर वह बार-बार खराब हो जाते हैं।
भीषण गर्मी की आहट के साथ ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार और संबंधित विभाग जल्द समस्या का समाधान नहीं करते हैं, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस मामले में जब संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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