द फॉलोअप डेस्क
रांची की 24 वर्षीय आदिवासी छात्रा सविता कच्छप ने अपने संघर्ष और मेहनत से साबित किया है कि आदिवासी भी बुलंदियों तक पहुंच सकते हैं। पिता के निधन और आर्थिक तंगी के बावजूद सविता ने हार नहीं मानी। उनके जीवन में कभी-कभी सूखी रोटी का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को साकार करने का हौसला नहीं खोया। सविता ने बीटेक, एमटेक की पढ़ाई पूरी की है और अब पीएचडी करने जा रही हैं, जिससे वह आदिवासी समुदाय की प्रतिनिधि के रूप में नई मिसाल कायम करेंगी। वह अपनी बड़ी मां के घर में रहती हैं। हालांकि, रिसर्च और पढ़ाई में लैपटॉप के साथ अन्य कई जरूरी चीजों की कमी उन्हें बाधित कर रही है। इसके बावजूद उनका आत्मविश्वास और परिवार का समर्थन उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। सविता की कहानी हाल ही में द फॉलोअप में दिखाई गई, जिसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान में लिया। मुख्यमंत्री ने रांची के डीसी को निर्देश दिया है कि होनहार सविता को हर संभव मदद दी जाए और उनके परिवार को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए। सविता ने कहा, “मैं लोगों की मानसिकता बदलना चाहती हूं कि आदिवासी सिर्फ जंगल में रहते हैं। मैं बताना चाहती हूं कि आदिवासी भी बुलंदियों तक जा सकते हैं।”
.@DC_Ranchi कृपया होनहार सविता कच्छप बहन को उच्च शिक्षा हेतु हर संभव मदद और परिवार को सभी जरूरी योजनाओं से जोड़ते हुए सूचित करें। https://t.co/KLW7JrixRT
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) December 26, 2025
