द फॉलोअप डेस्क
लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता और कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने आज कांग्रेस के विधायकों, मंत्रियों और सांसदों को दिल्ली में तलब किया है। लगभग शाम चार बजे से होनेवाली बैठक में राहुल झारखंड में सरकार और संगठन का स्कैनिंग करेंगे। यह जानने की कोशिश करेंगे कि विधानसभा चुनाव में पार्टी का 16 सीटों के आंकड़े को क्यों नहीं पार कर पाता है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एक से दो सीटों पर ही क्यों सिमट जाती है। संगठन और सरकार की समीक्षा के केंद्र में सात गारंटियां होंगी। मालूम हो कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने होटल बीएनआर में झारखंड की जनता से सात मुख्य वायदे किए थे। इसे सात गारंटी का नाम दिया गया था। लेकिन प्रदेश कांग्रेस द्वारा इन गारंटियों पर हुई कार्रवाई या कार्यवाही संबंधी दस्तावेज बताते हैं कि राहुल के सामने पार्टी के विधायक और मंत्री केवल मंईयां-मंईयां ही कर पाएंगे। क्योंकि मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को छोड़ अन्य कोई गारंटी जमीन पर नहीं उतर सका है। उसे लागू करने के लिए ठोस पहल नहीं हो सकी है।
सात गारंटियां और उसका हस्र
-1932 के खतियान आधारित स्थानीयता नीति लाने, सरना धर्म कोड को लागू करवाने के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषा-संस्कृति के संरक्षण को संकल्पित करने की गारंटी दी गयी थी। लेकिन चुनाव पूर्व विधानसभा से स्थानीय नीति और सरना धर्म कोड को लागू करने संबंधी प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजने के बाद इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई है।
-दिसंबर 2024 से मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को एक हजार रुपए मिल रहे थे, उसे बढ़ा कर 2500 करने की गारंटी थी, जो चुनाव पूर्व ही पूरी कर दी गयी।
-एसटी-28 प्रतिशत, एससी-12 प्रतिशत एवं ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने एवं अल्पसंख्यक के हितों का संरक्षण करने का वादा किया गया था। पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्रालय के गठन की गारंटी दी गयी थी। लेकिन इस दिशा में चुनाव बाद कुछ नहीं हो पाया है।
-पांच किलोग्राम की जगह प्रति व्यक्ति सात किलोग्राम राशन देने की गारंटी दी गयी थी। 450 रुपए में प्रत्येक परिवार को गैस सिलेंडर देने की भी गारंटी दी गयी थी। लेकिन दिशा में भी कुछ नहीं हुआ है।
-झारखंड के 10 लाख युवक-युवतियों को नौकरी एवं रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। ₹15 लाख तक परिवारिक स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा। नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराने का हाल बेहाल है। हालांकि मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लागू कर दी गयी है जिसके तहत प्रत्येक परिवार को 15 लाख रुपए तक हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा है।
गारंटी शिक्षा की:
-राज्य के सभी प्रखंडों में डिग्री कॉलेज तथा जिला मुख्यालयों में इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी। साथ ही, रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने हेतु औद्योगिक प्रोत्साहन नीति लाते हुए राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में 500-500 एकड़ का औद्योगिक पार्क बनाया जाएगा। जिन प्रखंडों व जिलों में पहले से कॉलेज खुले हैं या घोषणा हो चुकी है, उस पर कमोवेश कुछ-कुछ पहल हो रहा है। कोई नयी पहल नहीं हुई है।
-धान का न्यूनतम समर्थन मूल् को ₹2,400 से बढ़ाकर ₹3,200 करने के साथ-साथ लाह, तसर, करंज, इमली, महुआ, चिरोंजी, साल बीज आदि के समर्थन मूल्य में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि करने की गारंटी दी गयी थी। गारंटी अभी कागजों में ही दर्ज है। किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। पूर्व में लैंप्स और पैक्स के माध्यम से धान बेचनेवाले किसानों का ही अब तक भुगतान बकाया है।
विधायकों और मंत्रियों के बीच जारी विवाद
प्रदेश में संगठन की मजबूती के लिए समन्वय जरूरी है। लेकिन कांग्रेस के मंत्री और विधायक ही आपस में भिड़ रहे हैं। पिछले दिनों प्रदेश प्रभारी को हिदायत देना पड़ा कि मंत्री विधायकों की सुने और सार्वजनिक ढंग से आरोप-प्रत्यारोप लगाने से बाज आएं। कांग्रेस के विधायक साफ साफ आरोप लगा रहे हैं कि मंत्री उनकी नहीं सुनते। मंत्रियों का कहना है कि सरकार के शीर्ष पर बैठे अधिकारी उनकी नहीं सुनते। अब इसका समाधान क्या हो, राहुल गांधी को ही निकालना होगा। जानकारी के अनुसार इस बैठक के बाद कांग्रेस प्रदेश समन्वय समिति की बैठक बुलाने की कोशिश करेगी। उसमें चुनावी वादों और सरकारी कामकाज की स्थिति पर चर्चा करेगी।
वोट बैंक दुरुस्त करने पर होगी मशक्कत
राहुल गांधी की अध्यक्षता में होनेवाली इस बैठक में कांग्रेस द्वारा अपने वोट बैंक को दुरुस्त करने की मशक्कत होने की संभावना है। मालूम हो कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा से टूटनेवाले पिछड़े राजद और जेएलकेएम के साथ हो लिए। इसलिए कांग्रेस के लिए अल्पसंख्यक, आदिवासी, ईसाई और अगड़ों के अलावा पिछड़ों के वोट को साधने पर भी चर्चा होने की संभावना है।