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Jharkhand Budget 2022 : महागठबंधन में सदन के बाहर नहीं दिखा समन्वय, अंदर कैसे मजबूती से देंगे विपक्ष के सवालों का जवाब! 

महागठबंधन में सदन के बाहर नहीं दिखा समन्वय, अंदर कैसे मजबूती से देंगे विपक्ष के सवालों का जवाब! 

रांची: 


शुक्रवार से झारखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो गया। बजट सत्र से पहले गुरुवार देर शाम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कांके रोड स्थित आवास में झामुमो विधायक दल की बैठक हुई। हालांकि, परंपरा के मुताबिक ये बैठक यूपीए घटक दल की होनी चाहिये थी। या यूं कह लें कि गुरुवार शाम बुलाई गई बैठक सत्ता पक्ष की बैठक होनी चाहिए थी लेकिन इसमें महागठबंधन सरकार के घटक दल, कांग्रेस या आरजेडी को नहीं बुलाया गया था। दरअसल, बीते सत्र में जब मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को आमंत्रित किया था लेकिन उसमें कांग्रेस का एक भी विधायक या मंत्री नहीं पहुंचा। जाहिर है, इस बार बुलावा नहीं भेजा गया। 

मुख्यमंत्री ने विधायकों को दिया गुरुमंत्र
कल की बैठक की बात करें तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधायकों को गुरुमंत्र दिया। कहा कि बजट सत्र के दौरान यदि विपक्ष गुमराह करे या झूठे आरोप लगाए तो पूरी ताकत से उसका जवाब दें। सभी मंत्रियों से कहा कि वे सरकार के 2 साल के कार्यकाल में हासिल की गई उपलब्धियों की पूरी जानकारी रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायक या मंत्री वस्तुस्थिति से अच्छी तरह वाकिफ होंगे तो अपनी बात सदन में मजबूती से रख सकेंगें। 

खाली खजाना और महामारी थी चुनौती
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2 साल के कार्यकाल के दौरान हमारे सामने कई चुनौतियां थीं। हमें विरासत में खाली खजाना मिला। ऊपर से कोरोना महामारी आ गई। कहा कि बीजेपी सरकार ने अपने कार्यकाल में कर्ज को ही आय का स्त्रोत मान लिया था। राज्य वासियों को धोखे में रखा गया। सीएम ने कहा कि हमें केंद्र की तरफ से भी अपेक्षित मदद नहीं मिली। जीएसटी औ सीसीएल का बकाया भी नहीं मिला। सीएम ने कहा कि केंद्र दोहरा मापदंड अपना रही है। कई मामलों में झारखंड की उपेक्षा की गई। 

सदन में मजबूती से बताइये उपलब्धियां
मुख्यमंत्री ने अपने विधायकों और मंत्रियों से कहा कि बीते 2 साल में राज्य सरकार ने जो भी उपलब्धियां हासिल की, उसी पर केंद्रित कीजिये। सदन में ये भी बताएं कि राज्य सरकार ने कैसे सीमित संसाधन में भी समन्वय बनाकर राज्य को नई दिशा दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोल सब्सिडी, स्वजन पेंशन योजना, रोजगार की दिशा में किया गया कार्य, नियुक्ति में रफ्तार, ऐसे मुद्दे हैं जिस पर बीजेपी को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकता है। कहा कि कोई भी ऐसा मुद्दा ना छोड़ें जिससे विपक्ष को सदन में हावी होने का मौका मिले। 

सदन के बाहर महागठबंधन में समन्वय नहीं
मुख्यमंत्री ने उपरोक्त जिन उपलब्धियों का जिक्र किया है वो स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और वित्त और कृषि मंत्रालय के अधीन आता है। स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता हैं। ग्रामीण विकास आलमगीर आलम के जिम्मे है। वित्त डॉ. रामेश्वर उरांव संभाल रहे हैं और कृषि मंत्री बादल पत्रलेख हैं। गौरतलब है कि ये चारों मंत्री कांग्रेस कोटे से हैं।

जब मुख्यमंत्री सदन में उपलब्धियां गिनाने को कह रहे थे तब इनमें से कोई भी मंत्री बैठक में मौजूद नहीं था। मुख्यमंत्री ने समन्वय की बात की। सदन में मजबूती की बात की लेकिन जब सदन के बाहर कोई समन्वय नहीं दिखा तो अंदर कैसे दिखेगा। बड़ा सवाल है।