द फॉलोअप डेस्क, रांची:
झारखंड में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। प्रदेश में तकरीबन 3 दशक तक लाल आतंक का पर्याय रहे मिसिर बेसरा को सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार कर लिया। धनबाद-गिरिडीह के सीमावर्ती इलाके से उसे पकड़ा गया है। झारखंड में खासतौर पर छोटानागपुर और कोल्हान प्रमंडल में भाकपा (माओवादी) संगठन को खड़ा करने औऱ उसे मजबूत बनाने में मिसिर बेसरा की बड़ी भूमिका रही। बताया जाता है कि मिसिर बेसरा छात्र जीवन में ही वामपंथी विचारधारा वाला तात्कालीन संगठन एमसीसी के नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा से प्रभावित हुआ था। उसने प्रशांत बोस से प्रभावित होकर अग्र संगठन की बैठकों में भाग लेना शुरू किया था।

प्रशांत बोस के संपर्क में आया था मिसिर बेसरा
मिसिर बेसरा वर्ष 1985 में धनबाद जिले के सिंदरी में आयोजित ऑल इंडिया लीग फॉर रिवोल्यूशनरी कल्चर के द्वितीय राष्ट्रीय सम्मेलन में वॉलिंटियर के रूप में जुड़ा था। एमसीसी के नेता सोवन मरांडी ने वर्ष 1986 में मिसिर बेसरा को संगठन की प्राथमिक सदस्यता दिलाई। वर्ष 1990 में प्रशांत बोस उर्फ किशन दा ने मिसिर बेसरा को प्रेस के काम से कलकत्ता भेजा था। उस समय मिसिर बेसरा संगठन में सब-जोनल स्तर का ओहदा रखता था। मिसिर बेसरा का संगठन में प्रभाव बढ़ता गया।
वर्ष 1992 में कलकत्ता (कोलकाता) से वापस आकर उसने राजेश नाम के व्यक्ति के साथ मिलकर रांची और इसके सीमावर्ती जिलों में संगठन का प्रचार-प्रसार किया। वर्ष 1997 में मिसिर बेसरा ने दक्षिणी छोटानागपुर कमिटी का गठन किया।

झारखंड रीजनल कमिटी के गठन में अहम भूमिका
वर्ष 2000 में मिसिर बेसरा ने झारखंड रीजनल कमिटी के गठन में प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के साथ अहम भूमिका निभाई। इसी साल उसने रांची जिले के बुंडू क्षेत्र में मितन नाम के क्रियावादी के नेतृत्व में पहला सशस्त्र दस्ता गठित किया था। उसकी गतिविधियों से प्रभावित होकर वर्ष 2003 में मिसिर बेसरा को केंद्रीय कमिटी का सदस्य बनाया गया। सितंबर 2004 में संगठनों का विलय हुआ और मिसिर बेसरा को सेंट्रल मिलिट्री कमीशन और ईआरबी के मिलिट्री कमांड का प्रमुख बनाया गया। पूरे 3 दशक तक मिसिर बेसरा झारखंड में लाल आतंक का पर्याय बना रहा।