गढ़वा:
ये किसी ऐतिहासिक इमारत का खंडहर नहीं है बल्कि पेयजल और स्वच्छता विभाग का भवन है। कभी भी गिर जाने को आतुर छत, दरकती हुई दीवारें, उखड़े हुए खिड़की-दरवाजे और दरारों से भरा बरामदा। गढ़वा के पेयजल और स्वच्छता विभाग के भवन की यही पहचान है। यहां कर्मचारियों को डबल ड्यूटी करनी पड़ती है। दरअसल, इन्हें सरकारी फाइलों के निपटारे के साथ जिंदा रहने का प्रयास भी करना पड़ता है। दफ्तर का काम निपटाते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों का आंकड़ों और तथ्यों को याद करना काफी नहीं है। अगले ही पल छत या दीवार इनके ऊपर न आ गिरे, इसलिए उन्हें अक्सर अपने ईश्वर को भी याद करते रहना पड़ता है। जिंदगी भगवान भरोसे है, यदि इस लोकोक्ति को चरितार्थ होते देखना है तो गढ़वा के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के दफ्तर में घूम आइए।

एसडीओ और जेई ने भवन पर क्या कहा!
गढ़वा में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के एसडीओ शहनवाज अंसारी का कहना है कि भवन की हालत काफी खराब है। पूरी बिल्डिंग काफी जर्जर हालत में है। कभी भी हादसा हो सकता है। हालांकि, हमें ड्यूटी में आना ही पड़ता है। यहीं बैठना हमारी मजबूरी है। जान का डर प्रत्येक व्यक्ति को होता है, लेकिन यहीं इसी भवन में बैठने के अलावा हमारे पास विकल्प नहीं है। वहीं जेई अंकित कुमार ने कहा कि पहले यह सब-डिवीजन ऑफिस हुआ करता था, लेकिन अब यह भवन काफी खस्ता हालत में है। हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। यहीं बैठकर काम करना हमारी विवशता है।

बिल्डिंग में हादसे की आशंका बनी रहती है
इस भवन का काम जिले के नागरिकों को शुद्ध पेयजल, स्वच्छता और बेहतर स्वास्थ्य उपलब्ध कराना है। कम शब्दों में कहें तो नागरिकों की सुरक्षा इस भवन और यहां काम करने वाले कर्मचारियों की सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन यहां का कोना-कोना खुद असुरक्षित है। कब कहां से छत गिर पड़ेगी और कौन सी दीवार किधर दरक जाएगी, कहना मुश्किल है। आम लोगों की सुविधा के लिए बना यह भवन अब खुद सबसे असुविधाजनक हो गया है। अधिकारी-कर्मचारी हों कि आम नागरिक, इस भवन में घुसने से पहले सौ बार सोचते हैं।

भयभीत होकर काम करते हैं अधिकारी-कर्मी
विभाग के अधिकारी और कर्मचारी हमेशा डर के साये में काम करते हैं। हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। भय लगता है कि पता नहीं कब पूरा भवन भरभराकर गिर पड़ेगा। परिसर में झाड़ियां उग आई हैं। मानसून में सांप-बिच्छू का भय भी सताता है। कर्मचारियों का कहना है कि विभाग को हालात की जानकारी है, लेकिन समाधान का प्रयास नहीं किया जा रहा है। अधिकारी, कर्मचारी और आम लोग भी अपनी जान जोखिम में डालकर इस भवन में आते हैं। इन्हें एकदिन सुधार का इंतजार है और शायद सिस्टम को हादसे का।