पलामू
जिले में एक मां द्वारा आर्थिक तंगी और बीमारी के कारण अपने नवजात बेटे को बेच देने का मामला सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया और फिलहाल उसकी मां को सौंप दिया है। आगे की कार्रवाई बाल कल्याण समिति द्वारा की जाएगी।
मामला लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के लोटा गांव का है, जहां की रहने वाली पिंकी देवी ने अपने नवजात को लातेहार के एक निसंतान दंपती को 50 हजार रुपये में सौंप दिया था। इस घटना की खबर सामने आते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गंभीरता दिखाई और पलामू डीसी को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसी आदेश के बाद लेस्लीगंज पुलिस की टीम पिंकी देवी को साथ लेकर लातेहार पहुंची और नवजात को दंपती से रेस्क्यू किया।

आर्थिक मदद और आगे की जांच
बाल कल्याण समिति और जिला प्रशासन ने भी पूरे मामले में हस्तक्षेप किया। शनिवार को समिति की टीम पिंकी देवी के घर पहुंची और परिवार की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद लेस्लीगंज प्रखंड कार्यालय की ओर से परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जानकारी बाल कल्याण समिति को सौंप दी गई है और दंपती से बच्चे को खरीदने के प्रयास की दिशा में कानूनी कार्रवाई भी आगे बढ़ाई जा रही है।
क्या बोले अधिकारी
"बच्चे का रेस्क्यू कर लिया गया है। मामले की रिपोर्ट बाल कल्याण समिति को दी जा रही है। बच्चे को खरीदने वाला दंपती निसंतान है। आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।" – उत्तम कुमार राय, थाना प्रभारी लेस्लीगंज
गरीबी और बीमारी बनी वजह
पुलिस की पूछताछ और मीडिया से बातचीत में पिंकी देवी ने खुलासा किया कि उन्होंने मजबूरी में यह कदम उठाया। पिंकी स्तन कैंसर से पीड़ित हैं और पहले से चार बच्चे (दो बेटे, दो बेटियां) हैं। आर्थिक हालात इतने कमजोर थे कि नवजात की परवरिश असंभव लग रही थी। इसी कारण उन्होंने बेटे को बेचने का निर्णय लिया।
