द फॉलोअप डेस्क, रांची:
14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप में गिरफ्तार मो. एबाद ने खुलासा किया है कि OMR और OSM शीट के साथ व्यापक पैमाने पर छेड़छाड़ की गई थी। यूपी के अयोध्या जिला स्थित रोनाही गांव निवासी मो. एबाद सितंबर 2025 में पहली बार रांची आया था। अतीत में वह जुलाई 2023 में पिकार टेक्नोलॉजी प्रा.लि में 12,500 रुपये के वेतन पर नौकरी करता था। पिकार टेक्नोलॉजी के निदेशक मो. उस्मान जो कि TDPL के माध्यम से JPSC कार्यालय में टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर थे, मो. एबाद को हेल्प डेस्क में 18,000 रुपये प्रतिमाह की नौकरी का ऑफर देकर रांची लाए। एबाद का काम फॉर्म भरने वाले अभ्यर्थियों की सहायता करना था, लेकिन वह बिना किसी औपचारिक नियुक्ति पत्र के ही मो. उस्मान के निर्देश पर काम करने लगा था।

अभय तिवारी और श्वेता गुप्ता की बड़ी भूमिका
मो. एबाद ने CID के सामने खुलासा किया है कि JPSC की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और TDPL का पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी उर्फ मनोज के निर्देश पर एजेंट अभ्यर्थियों से मिलते थे और उनके साथ समन्वय बनाते थे। सेटिंग पक्की होने के बाद OMR और OSM शीट में बदलाव किया जाता था। बताया जा रहा है कि OMR से जुड़ा काम प्रदीप नाम का शख्स देखता था, जबकि OSM से संबंधित काम हेमंत वर्मा संभालता था। दरअसल, हेमंत वर्मा ही वह शख्स है, जिसने पूरे सिस्टम को डेवलप किया था। खुलासा हुआ है कि OMR और OSM शीट में हेरफेर का काम मुख्य रूप से हेमंत वर्मा और संजय मिलकर करते थे। संजय लगातार अभय तिवारी के संपर्क में रहता था।
अभय और श्वेता आपस में तालमेल बिठाकर अभ्यर्थियों के साथ लाइजनिंग का काम संभालते थे। बताया गया है कि जब भी शीट में टेंपरिंग और मैनिपुलेशन का काम होता था, उस दौरान रामवीर सिंह और सतपाल की एक विशेष टेक्निकल टीम बाहर से बुलाई जाती थी।

पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसने की तैयारी
खुलासा हुआ है कि इस पूरे फर्जीवाड़े की निगरानी और सुपरवाइजरी का काम मो. उस्मान के पास था। मो. एबाद को अधिकांश वेतन कैश में दिया जाता था और कभी जरूरत पड़ी तो उसके बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में डाल दिया जाता था। CID के सामने मो. एबाद के कबूलनामे के बाद श्वेता गुप्ता, अभय तिवारी और इस गिरोह से जुड़े अन्य व्यक्तियों पर शिकंजा कसने की तैयारी है।