रांची :
रांची सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के सॉ मिल और आरा मिल संचालकों को हो रही परेशानी को लेकर सोमवार को झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के फॉरेस्ट एंड टिम्बर उप समिति की बैठक हुई। चैंबर भवन में उप समिति चेयरमेन तुलसी पटेल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में झारखंड टिम्बर सॉ मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र जैन के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों के कई सॉ मिल एवं आरा मिल के संचालक उपस्थित थे। बैठक में सॉ एवं आरा मिलों के संचालन में आ रही कठिनाईयों पर चर्चा हुई। राज्य में 1996 के पूर्व वन क्षेत्र से पांच कि.मी के दायरे में संचालित आरा मिल को नियमित करने के वन विभाग के प्रस्ताव को राज्य सरकार द्वारा अस्वीकृत किए जाने से हो रही कठिनाईयों पर बात हुई। दरअसल सर्वोच्च न्यायालय के आदेश संख्या 202/1995, दिनांक 12.12.1996 के आलोक में बिहार सरकार द्वारा दिनांक 28.10.2000 को अधिसूचना निर्गत कर स्पष्ट रूप से यह प्रावधानित किया गया था कि दिनांक 12.12.1996 के पूर्व से स्थापित आरा मिल जो नगर निगम, नगर पंचायत क्षेत्र एवं अधिसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं, उस क्षेत्र के वन सीमा से 5 कि.मी. के अंतर्गत स्थापित होने के बावजूद भी उसे सुचारू रूप से संचालन का प्रावधान दिया गया था। साथ ही वैसे आरा मिलों को 2 वर्ष के अंदर वन सीमा से 5 कि.मी की दूरी के बाहर स्थानांतरित करने का प्रावधान किया गया था। झारखंड सरकार द्वारा वर्ष 2003 में इस प्रावधान को स्वीकृत किया गया है और इस अंतर्गत झारखण्ड में स्थापित आरा मिलों की समीक्षा की गई। पुनः वर्ष 2005-06 में वन प्रमंडल पदाधिकारी, झारखण्ड द्वारा स्थापित आरा मिलों का विवरण मंगाया गया जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुकूल स्थापित हुए, की सूचि माननीय सर्वोच्च न्यायालय में भेजी गई। इसके बाद वर्ष 2016 में मुख्य सचिव झारखंड द्वारा अवैध सॉ मिलों को बंद करने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पत्राचार किया गया।

निर्णय की आड़ में नोटिस जारी करना गलत
बैठक में यह कहा गया कि उक्त निर्णय की आड़ में वैध आरा मिलों को आकाशीय दूरी से मापकर, जबरदस्ती बंद करने का नोटिस निर्गत किया गया जो पूर्णतः गलत है। क्योंकि पूर्व में वन सीमा से 5 कि.मी की दूरी मापकर संचालन हेतु अनुमोदन किया जा चुका था। मगर उक्त आदेश के आलोक में आनन-फानन में पूर्व के बिना जांच किए वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा नोटिस निर्गत कर वैध आरा मिलों को बंद कराया गया। जिसके विरूद्ध राज्य के समस्त प्रभावित आरा मिलों द्वारा उच्चतम न्यायालय में इस गलत आदेश के विरूद्ध याचिका दायर कर संचालन के लिए आग्रह किया गया है।

5 कि.मी की दूरी की बंदिश से मिली है छूट
8.04.2019 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लीव ग्रांट करते हुए सभी आरा मिलों में स्थित स्टॉक को बिक्री करने के लिए, चिराई करने का आदेश पारित किया गया और 90 दिन के अंदर झारखंड सरकार को हलफनामा दायर करने का आदेश दिया गया। 5 कि.मी की दूरी जो वन सीमा से रखी गई है उसे घटाने के लिए भी न्यायालय ने आदेश पारित किया। जिसके आलोक में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित राज्यस्तरीय समिति (एसएलसी) प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) की अध्यक्षता में दिनांक 25.11.2021 को आहूत बैठक में सर्वसम्मति से दिनांक 12.12.1996 के पूर्व संचालित अथवा स्थापित आरा मिलों के संचालन में 5 कि.मी की दूरी की बंदिश से छूट दी गई। यह निर्णय एसएलसी ने सर्वोच्च न्यायालय के आलोक में लिया। जिसे सरकार में अनुशंसा करके भेजा गया। मगर राज्य सरकार द्वारा अब तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। जिस कारण सभी वैध आरा मिलें बंदी के कगार पर है। सरकार द्वारा अब तक इस दिशा में कोई कारगर पहल नहीं किए जाने के कारण कुछ मिलें बंद हो गई हैं जिससे हजारों की संख्या में लोग बेरोजगार हो गये हैं। इससे सरकार के राजस्व की भी हानि हो रही है।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप का किया जाएगा अनुरोध
बैठक में इस समस्या पर विचार करते हुए यह निर्णय लिया गया कि झारखंड टिम्बर सॉ मिल एसोसिएशन के सदस्यों की समस्याओं के निदान के लिए झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप का अनुरोध किया जाएगा। आग्रह किया जाएगा कि राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार को साकारात्मक अनुशंसा और सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा भी भेजी जाए। बैठक में टिम्बर ट्रेडर्स की अन्य समस्याओं पर भी बातचीत हुई। निर्णय लिया गया कि सदस्यों की क्षेत्रीय समस्याओं पर विभागीय अधिकारियों से सामंजस्य बनाकर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में चैंबर अध्यक्ष किशोर मंत्री, उप समिति चेयरमेन तुलसी पटेल, सदस्य राजीव कुमार, जयकांत जयसवाल, इंद्रजीत सिन्हा, तुलसी मंडल, एसके जैन, राधेष्याम अग्रवाल, बैजनाथ भगत, मो. मुश्ताक जमाल, जगदीश कुमार, शंभू साव, मो. इस्तीयाक, तापस कुमार, सुबल कुंभकर, महिम मंडल, सुभाष मंडल के अलावा कई सॉ और आरा मिल संचालक उपस्थित थे।