द फॉलोअप डेस्क:
झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितता के मामले में CID की ओर से अदालत में दाखिल चार्जशीट (Chargesheet) में उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता (Shweta Kumari Gupta) की भूमिका को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं। चार्जशीट के मुताबिक, श्वेता गुप्ता पर अपने पद और अधिकारों का कथित दुरुपयोग कर निजी एजेंसियों को फायदा पहुंचाने और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां साझा करने के आरोप हैं। जांच का एक अहम हिस्सा TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी TDPL और बिंसिस एजेंसी को परीक्षा से जुड़े काम सौंपने की प्रक्रिया भी है।

TDPL को काम देने की प्रक्रिया पर सवाल
30 मई 2025 से 5 जून 2025 तक JPSC के तत्कालीन नियमित परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा अवकाश पर थे। इस दौरान श्वेता कुमारी गुप्ता को परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। इसी अवधि में TDPL को परीक्षा संबंधी कार्यों के लिए सूचीबद्ध करने यानी एम्पैनल करने की प्रक्रिया पूरी कराई गई। CID की जांच में एजेंसी के चयन और उसे परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी देने के आधार पर भी सवाल उठाए गए हैं। अगस्त 2026 में सामने आई पूछताछ से जुड़ी जानकारी के अनुसार, टीडीपीएल को निविदा के बजाय नामांकन के आधार पर काम देने की बात भी जांच के दायरे में रही है।
14वीं JPSC परीक्षा के रिजल्ट से जुड़ा बड़ा आरोप
चार्जशीट में 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। CID के अनुसार, परीक्षा का परिणाम आधिकारिक रूप से जारी होने से पहले ही उससे जुड़ी संवेदनशील जानकारियां TDPL के कर्मचारी मोहम्मद उस्मान के साथ साझा की गई थीं। जांच में श्वेता गुप्ता और उस्मान के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट का भी उल्लेख है। इसमें परीक्षा के प्रश्न-उत्तर, OMR शीट के पुनर्मूल्यांकन, अभ्यर्थियों के रोल नंबर और पास होने वाले अभ्यर्थियों की श्रेणीवार संख्या जैसी जानकारियां साझा होने का दावा किया गया है। सीआईडी ने इन डिजिटल साक्ष्यों को भी अदालत के समक्ष रखा है।

बिंसिस एजेंसी को लेकर भी जांच
वहीं, चार्जशीट में बिंसिस एजेंसी को जेपीएससी में परीक्षा संबंधी काम दिलाने के मामले का भी जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग की तत्कालीन सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य के निजी सहायक ब्रज कुमार राम ने जांच के दौरान बताया कि उन्होंने एजेंसी को काम दिलाने के लिए तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के मिजोरम स्थित आवास पर 2.50 लाख रुपये पहुंचाए थे। यह भुगतान से जुड़ा आरोप है, जिसकी जिम्मेदारी और पूरी परिस्थितियों को कानूनी प्रक्रिया में परखा जाना है।
अब अदालत में होगी आरोपों की पड़ताल
गौरतलब है कि जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले में सीआईडी ने 22 अक्टूबर 2026 को तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता समेत पांच आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसके अलावा तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत अन्य लोगों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल किए जाने की खबर सामने आई है।
CID ने दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों को अपनी जांच का आधार बनाया है। अब इस पूरे मामले में अदालत की सुनवाई और आगे की कानूनी कार्रवाई अहम होगी।