द फॉलोअप डेस्क
झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को जामताड़ा के उपायुक्त से मुलाकात कर लंबे समय से लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाया। जिलाध्यक्ष नारायण मंडल के नेतृत्व में पहुंचे इस शिष्टमंडल ने राज्य गठन में अहम भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारियों के सम्मान और पहचान का मुद्दा जोरदार ढंग से रखा। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को बताया कि जिला प्रशासन और आंदोलनकारी आयोग द्वारा लगभग 900 आंदोलनकारियों की पहचान की जा चुकी है, लेकिन अब तक उन्हें औपचारिक रूप से सम्मानित नहीं किया गया है। मांग पत्र के माध्यम से सभी आंदोलनकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर उनके योगदान को आधिकारिक मान्यता देने की अपील की गई। जिलाध्यक्ष नारायण मंडल ने कहा कि
झारखंड आंदोलन केवल एक संघर्ष नहीं था, बल्कि जल, जंगल और जमीन की पहचान की लड़ाई थी। जिन्होंने राज्य गठन के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उनका सम्मान करना प्रशासन और समाज की नैतिक जिम्मेदारी है।

उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए सकारात्मक रुख अपनाया और जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया। प्रस्तावित कार्यक्रम की रूपरेखा को देखते हुए संभावित तिथि 1 अप्रैल से 10 अप्रैल के बीच नगर भवन, दुलाडीह (जामताड़ा) में भव्य समारोह में सभी चिह्नित आंदोलनकारियों को सम्मानित किया जा सकता है। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों में खुशी और उत्साह का माहौल है। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आग्रह किया कि आयोजन पारदर्शिता और गरिमा के साथ किया जाए। इस मौके पर इम्तियाज खान, मुरारी प्रसाद सोनी, भारतेंदु मुर्मू, मनोज राव, अली मोहम्मद, करामत अंसारी, इजराइल अंसारी, अजीम अंसारी और नेबु महतो सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
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