द फॉलोअप डेस्क
जामताड़ा जिला प्रशासन ने आम लोगों की समस्याओं के त्वरित और संवेदनशील समाधान की एक मिसाल पेश की है। उपायुक्त आलोक कुमार ने समाहरणालय परिसर में पोर्टिको के पास खड़े एक बुजुर्ग और उनकी बेटी की परेशानी को देखकर अपनी गाड़ी रुकवाई और स्वयं उनकी समस्या सुनी। शिकायत मिलने के बाद उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई का निर्देश दिया। उपायुक्त के पूछने पर नाला प्रखंड के कुलडंगाल गांव की रहने वाली नमिता पाल ने बताया कि उसे मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना की राशि अब तक नहीं मिली है। योजना का लाभ पाने के लिए वह अपने पिता के साथ कई दिनों से कार्यालयों के चक्कर लगा रही थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था।

तकनीकी खामी बनी भुगतान में बाधा
उपायुक्त के निर्देश के बाद संबंधित विभाग ने मामले की तत्काल जांच की। जांच में पता चला कि तकनीकी कारणों से नमिता पाल का नाम पेंडिंग सूची में चला गया था, जिसके कारण भुगतान रुका हुआ था। अधिकारियों ने तुरंत तकनीकी त्रुटि को दूर करते हुए आश्वस्त किया कि आगामी मंगलवार तक तीन महीने की लंबित मंईया सम्मान योजना की राशि एक साथ उनके बैंक खाते में भेज दी जाएगी।

प्रशासन की पहल से लौटी मुस्कान
जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बाद नमिता पाल और उनके पिता ने राहत की सांस ली। दोनों ने उपायुक्त आलोक कुमार और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रशासन का कहना है कि आमजनों की समस्याओं का पारदर्शी, त्वरित और संवेदनशील समाधान सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।