जामताड़ा
जामताड़ा जिले के प्रशासनिक महकमे में पारदर्शिता और कार्यकुशलता लाने के उद्देश्य से डीसी आलोक कुमार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित जिला स्थापना, अनुकंपा एवं जिला चौकीदार अनुकंपा समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि एक ही स्थान पर लंबे समय से कार्यरत कर्मियों को अब स्थानांतरित किया जाएगा।
तबादले की जद में आएंगे लंबे समय से जमे कर्मी
बैठक के दौरान उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि समाहरणालय संवर्ग के वैसे कर्मी, जो पिछले ढाई वर्षों से अधिक समय से जिला, अनुमंडल या प्रखंड स्तर के विभिन्न कार्यालयों में पदस्थापित या प्रतिनियुक्त हैं, उनका अविलंब स्थानांतरण किया जाए। इसके अतिरिक्त, विभिन्न 'लाइन विभागों' में वित्तीय कार्यों का संपादन कर रहे कर्मियों के लिए भी कड़े रुख अपनाए गए हैं। मुख्य सचिव और वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के आलोक में, ऐसे कर्मियों के स्थानांतरण के लिए संबंधित कार्यालय प्रधानों को एक सप्ताह के भीतर विभागीय पत्राचार करने का आदेश दिया गया है।

रिक्त पदों और प्रतिवेदनों की समीक्षा
डीसी आलोक कुमार ने जिले के सभी कार्यालयों में स्वीकृत पदों और वर्तमान में कार्यरत बल की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से इन पदों की जानकारी ली जिनमें प्रधान लिपिक एवं कार्यालय अधीक्षक, उच्च एवं निम्न वर्गीय लिपिक और विपत्र लिपिक (DDO वार पदस्थापन अवधि के साथ)। समीक्षा के दौरान कुछ विभागों द्वारा रिपोर्ट जमा नहीं करने पर उपायुक्त ने गहरी नाराजगी व्यक्त की और आज शाम तक हर हाल में डेटा उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम दिया। इन कार्यों में तेजी लाने के लिए परीक्ष्यमान उपसमाहर्ताओं को भी सहयोग करने के लिए निर्देशित किया गया है। बैठक में राहत की बात यह रही कि वर्तमान में अनुकंपा का कोई भी मामला लंबित नहीं पाया गया। हालांकि, जिला चौकीदार अनुकंपा समिति के तहत ACP, MACP और सेवा संपुष्टि से जुड़े कुल 34 मामलों पर चर्चा की गई। कुछ मामलों में दस्तावेज अपूर्ण पाए गए, जिन्हें दुरुस्त कर अगली बैठक में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने की उम्मीद
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से पुलिस अधीक्षक शम्भू कुमार सिंह, उप विकास आयुक्त निरंजन कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी अनंत कुमार, स्थापना उप समाहर्ता पंकज कुमार रवि, डीएसपी संजय कुमार सिंह, उप निर्वाचन पदाधिकारी विजय कुमार एवं अन्य संबंधित अधिकारी। वहीं उपायुक्त के इस कड़े रुख से जिला प्रशासन में हड़कंप है। ढाई साल से एक ही सीट पर "कुंडी मारकर" बैठे कर्मियों के तबादले से कार्यशैली में नयापन आने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।