गुमला:
Jharkhand News: झारखंड (Jharkhand) में यदि जंगली हाथी (Wild Elephant) के चपेट में आने से किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके आश्रितों को 10 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। पीड़ित परिवार को 3 दिनों के भीतर 1 लाख रुपये का भुगतान कर दिया जाता है। व्यक्ति की मौत के 2 सप्ताह के भीतर और 4 लाख रुपये का भुगतान कर दिए जाने का प्रावधान है। गुमला के जिला वन अधिकारी अहमद बिलाल अनवर (DFO Ahmad Bilal Anwar) ने बताया कि मुआवजा राशि में से शेष 5 लाख रुपये आश्रित के नाम पर आगामी 5 वर्षों के लिए फिक्स डिपॉजिट कर दिया जाता है।
डीएफओ ने जानकारी दी है कि जंगली हाथी की चपेट में आने से मौत के मामले में पीड़ित परिवार को 2 हजार रुपये प्रतिमाह बैंक के माध्यम से भुगतान किया जाता है।

गंभीर और आंशिक रूप से घायल होने पर मुआवजा
जिला वन अधिकारी अहमद बिलाल अनवर ने बताया कि किसी जंगली जानवर के हमले में गंभीर रूप से घायल होने पर संबंधित व्यक्ति को 2 लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है। हल्की चोट लगने पर 35 हजार रुपये मिलते हैं। यदि जंगली हाथी के द्वारा मकान को पूरी तरह ढहा दिया जाता है तो पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपये का भुगतान किए जाने का प्रावधान है। यदि मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ हो तो पीड़ित को 1.30 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है। जंगली जानवर अगर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं तो क्षतिपूर्ति के रूप में 3600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाता है।
डीएफओ ने कहा कि ग्रामीणों तक योजना की सही जानकारी होना जरूरी है। जागरूकता से वे प्रियजन की मृत्यु पर भी सुरक्षित जीवन जी सकते हैं।
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गुमला में घूम रहा है जंगली हाथियों का झुंड
दरअसल, गुमला में इन दिनों जंगली हाथियों का झुंड घूम रहा है। आम लोगों में दहशत है। गुमला सहित झारखंड के कई इलाके वैसे हैं, जहां जंगली हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष होता है और इसमें दोनों पक्षों को नुकसान होता है। मानव के साथ संघर्ष में कई बार हाथी भी अपनी जान गंवाते हैं। लोगों को भी जानमाल की हानि होती है। डीएफओ अहमद बिलाल अनवर ने कहा कि स्थानीय लोगों को वन विभाग द्वारा चेतावनी दी जाती है कि वे जंगली हाथियों से छेड़छाड़ ना करें। झुंड के पास जाने का प्रयास नहीं करें। उन्होंने कहा कि कई बार लोग अपनी फसल या मकान बचाने की कोशिश में जंगली हाथियों के हाथों मारे जाते हैं।
डीएफओ ने कहा कि सरकार ने फसल और मकान के नुकसान पर मुआवजा तय किया है, इसलिए जब गांव में जंगली हाथों का प्रवेश होता है तो मकान और फसल बचाने की कोशिश में जान जोखिम में डालने की जगह सुरक्षित स्थान की ओर भागें।
वन प्रमंडल पदाधिकारी को सूचना देने की अपील
गुमला डीएफओ अहमद बिलाल अनवर ने कहा कि यदि किसी इलाके में जंगली जानवर की सक्रियता दिखे तो तुरंत इसकी सूचना वन विभाग के कर्मियों अथवा वन प्रमंडल पदाधिकारी को दीजिए। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से जंगली हाथियों का झारखंड समेत आसपास के राज्यों में भोजन, प्रजनन, आवास और विचरण के लिए तय मार्ग है। यदि उस मार्ग को इंसानों द्वारा अवरुद्ध किया जाएगा तो संघर्ष बढ़ेगा। उन्होंने जानकारी दी है कि यदि हाथियों का झुंड गुमला से निकलकर रांची, खूंटी या लातेहार की ओर जाता है तो इसकी जानकारी उस जिले के डीएफओ को दी जाती है।