द फॉलोअप डेस्क
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार सुबह निधन हो गया। वह 80 वर्ष की थीं। उनके चिकित्सकों के मुताबिक खालिदा जिया कई उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं, जिनमें लिवर का एडवांस्ड सिरोसिस, आर्थराइटिस, डायबिटीज और हृदय और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं शामिल थीं। बीएनपी ने उनके निधन की पुष्टि की है। जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 6 बजे फज्र की नमाज के तुरंत बाद उन्होंने आखिरी सांस ली। बीएनपी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर उनके निधन की जानकारी दी और सभी से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की अपील की। खालिदा जिया का इलाज 23 नवंबर से ढाका के एवरकेयर हॉस्पिटल में चल रहा था और 11 दिसंबर से उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। इस महीने की शुरुआत में उनके एडवांस मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए उन्हें लंदन भी भेजा गया था। उनके बेटे तारिक रहमान हाल ही में 17 साल के देश निकाले के बाद बांग्लादेश लौटे हैं और एवरकेयर हॉस्पिटल में अपनी बीमार मां से मिले। बीएनपी ने बताया कि उनका निधन सुबह 6 बजे हुआ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खालिदा जिया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने उन्हें बांग्लादेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण नेता के रूप में याद किया और कहा कि बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि 2015 में ढाका में उनकी गर्मजोशी भरी मुलाकात याद है और उनकी दृष्टि और विरासत भारत-बांग्लादेश संबंधों को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शक रहेगी। खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के दिनाजपुर में हुआ था। उन्होंने लंबे समय तक बांग्लादेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और 1991-96 और 2001-2006 तक प्रधानमंत्री रहीं। उनकी शादी जिया उर रहमान से हुई थी, जो बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई के समय एक बड़े नेता थे और 1977 में राष्ट्रपति बने थे। 1981 में उनकी हत्या कर दी गई थी।

खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान भी बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और अगले साल होने वाले राष्ट्रीय चुनाव में प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में उभर रहे हैं। उनका यह राजनीतिक पुनरागमन पिछले साल जुलाई में हुए विद्रोह और राजनीतिक तनाव के बीच हुआ है। खालिदा जिया के निधन से बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा झटका लगा है, खासकर फरवरी 2026 में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से पहले। उनके अंतिम संस्कार और आधिकारिक कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर अभी और जानकारी का इंतजार है।