द फॉलोअप डेस्कः
झारखंड में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। झारखंड पुलिस की वेबसाइट के मुताबिक़ राज्य में हर रोज़ औसतन चार से अधिक महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं होती हैं। पिछले 9 साल के दौरान झारखंड में बलात्कार की कुल 13,533 घटनाएं दर्ज कराई गई हैं. इन मामलों में अभियुक्तों को सज़ा दिलाने के मामले भी संतोषजनक नहीं हैं। झारखंड पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक़ साल 2015 से 2023 के बीच राज्य में बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की कुल 13,533 घटनाएं दर्ज कराई गई हैं। दुष्कर्म के मामलों में गिरफ्तार दरिंदों को सजा दिलवाने में भी पुलिस का काम संतोषजनक नहीं है।

2018 से 2023 तक के आंकड़ें
साल 2018 से लेकर 2023 के दिसंबर तक झारखंड के विभिन्न जिलों में 14162 दुष्कर्म की वारदातें विभिन्न थानों में रिपोर्ट किए गए। बोकारो में 762, चाईबासा में 497, देवघर में 446, धनबाद में 1021, दुमका में 318, गढ़वा में 897, गिरिडीह में 925, गोड्डा में 669, गुमला में 605, हजारीबाग में 967, जमशेदपुर में 740, जामताड़ा में 198, खूंटी में 237, कोडरमा में 281, लातेहार में 384, लोहरदगा में 416, पाकुड़ में 357, पलामू में 704, रेल धनबाद में पांच, रेल जमशेदपुर में तीन, रामगढ़ में 318, रांची में 1484, साहिबगंज में 872, सरायकेला में 295 और सिमडेगा में 323 रेप के मामले दर्ज किए गए।

रिपोर्ट जमा नहीं कर पाती है पुलिस
क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट 2018 के लागू होने के बाद यह नियम बनाया गया था कि दुष्कर्म के मामलों का अनुसंधान दो माह में पूरा कर फाइनल रिपोर्ट कोर्ट जमा करना होता है। इसके बावजूद झारखंड पुलिस रेप के 8000 से अधिक मामलों का अनुसंधान निर्धारित अवधि में पूरा नहीं कर पाई। झारखंड के सिमडेगा, रेल जमशेदपुर और चाईबासा पुलिस के द्वारा ही दो माह में 50% से अधिक रेप के मामलों का अनुसंधान पूरा किया गया है। जबकि झारखंड के दूसरे जिलों का प्रदर्शन 50% से भी काफी नीचे है। क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट 2018 लागू होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने झारखंड पुलिस को एक पत्र लिखकर दुष्कर्म के मामलों का अनुसंधान दो माह में पूरा करने और फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में समर्पित करने का आदेश दिया था। दुष्कर्म के मामलों के अनुसंधान की स्थिति की निगरानी के लिए भारत सरकार ने इन्वेस्टिगेशन ट्रेनिंग सिस्टम फॉर सेक्सुअल ऑफेंस नाम से पोर्टल भी बना रखा है, जिसमें दर्ज आंकड़े झारखंड पुलिस के फेल होने की पुष्टि करते हैं।