पूर्वी सिंहभूम
पूर्वी सिंहभूम जिले में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया से अब तक पांच बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग सख्त हो गया है। दरअसल, जिले में शुक्रवार को भी ब्रेन मलेरिया के 128 नये मरीज मिले हैं, जिनमें सबसे अधिक 35 मरीज पोटका के हैं। वहीं तीन बच्चों की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ऐसे में मलेरिया के बढ़ते मामलों और बच्चों की मौत को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के 11 डॉक्टरों और एक MPW कर्मी को शोकॉज किया है। सभी से 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गयी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 29 जून से 10 जुलाई तक जिले में 77,770 लोगों की मलेरिया जांच की गयी, जिसमें 1731 लोग संक्रमित पाये गये हैं।

पोटका में सबसे ज्यादा मरीज
वहीं, शुक्रवार को 14,200 लोगों की जांच की गयी, जिसमें ब्रेन मलेरिया के 128 मरीज मिले। मरीजों की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में सर्वे और जांच अभियान तेज कर दिया है। सिविल सर्जन ने बताया कि पूरे जिले में मलेरिया नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बचाव के उपाय बताये जा रहे हैं। जिले में मलेरिया मरीजों की संख्या पर नजर डालें तो पोटका में सबसे अधिक 2409 मरीज मिले हैं, जिनमें 35 ब्रेन मलेरिया से संक्रमित हैं। इसके अलावा पटमदा में 330, घाटशिला में 1458, डुमरिया में 1773, मुसाबनी में 2002, धालभूमगढ़ में 1031, बहरागोड़ा में 1044, चाकुलिया में 1021, जुगसलाई में 2386 और सदर अस्पताल में 215 मरीज मिले हैं। वर्तमान में सदर अस्पताल में 40 ब्रेन मलेरिया मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं एमजीएम अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में 9 बच्चों को भर्ती कराया गया है। इनमें 5 बच्चों का इलाज पीआईसीयू और 4 बच्चों का सामान्य वार्ड में चल रहा है। एक बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है।

एमजीएम करेगा कारणों की जांच
मलेरिया संक्रमण तेजी से बढ़ने के कारणों का पता लगाने की जिम्मेदारी एमजीएम मेडिकल कॉलेज को दी गयी है। मेडिकल कॉलेज की टीम यह जांच करेगी कि संक्रमण फैलने की वजह क्या है और इसकी रोकथाम के लिए कौन-कौन से कदम उठाये जाने की जरूरत है। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया है कि बुखार से पीड़ित मरीजों की तत्काल रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट से जांच की जाये। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीजों को तुरंत एंटी-मलेरिया दवा उपलब्ध कराई जाये। सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों के इलाज और निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। सभी चिकित्सा पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहकर मलेरिया नियंत्रण अभियान की मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया गया है।
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