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Followup Exclusive : हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में हो रहे प्रोन्नति के खेल पर CM ने कसी नकेल

हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में हो रहे प्रोन्नति के खेल पर CM ने कसी नकेल

द फॉलोअप डेस्क, रांचीः

Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट(High court) के आदेश के आलोक में प्रोन्नति (Promotion) को लेकर विभागों में हो रहे खेल की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नकेल डाल दिया है। मुख्यमंत्री ने पथ निर्माण विभाग से पूछा है कि पिछले तीन साल से कितने ऐसे डिफॉल्ट एलपीए लंबित हैं। इसके लिए दोषी कौन है और उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गयी है। मुख्यमंत्री ने ऐसे अधिकारी को चिह्नित कर उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का निर्देश भी दिया है। इसके बाद विभागों में, खास कर कार्य विभागों ( Works Department) हड़कंप की स्थिति है।

क्या है मामला

पथ निर्माण विभाग में कार्यपालक अभियंता से अधीक्षण अभियंता के पद पर प्रोन्नति को लेकर कुछ इंजीनियर हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने इंजीनियरों की याचिका पर सुनवाई के बाद उनके पक्ष में फैसला दिया। फैसले के आलोक में उन्हें कार्यपालक अभियंता से अधीक्षण अभियंता के पद पर प्रोन्नति देनी थी। लेकिन सरकार का मानना था कि हाईकोर्ट का फैसला नियमानुकूल नहीं है, इसलिए विभाग को एलपीए में जाना चाहिए। एलपीए में जाने का आदेश भी हुआ। एलपीए भी दाखिल हुआ। लेकिन उस एलपीए पर आज तक सुनवाई नहीं हुई, क्योंकि याचिका में डिफॉल्ट था। डिफॉल्ट होने के कारण याचिका लंबित ही रहती जा रही है। कभी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो पा रही है। इस तरह के मामलों में विभाग की जिम्मेदारी होती है कि उसके नोडल अफसर महाधिवक्ता या संबंधित अपर महाधिवक्ता व अन्य से मिल कर डिफॉल्ट को दूर कराएं। याचिका को सुनवाई योग्य बनवाएं। लेकिन विभाग ने ऐसा नहीं किया।

क्या है अंदरुनी खेल

जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट के आदेश पर प्रोन्नति देने के खेल की जानकारी धीरे-धीरे सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचने लगी। पथ निर्माण विभाग ही नहीं, अन्य विभागों में भी यह खेल जारी है। इस खेल में हाईकोर्ट के आदेश आने के बाद विभाग एलपीए में जाने का निर्णय लेता है। एलपीए भी दाखिल होता है। लेकिन उसमें कुछ ऐसी त्रुटि छोड़ दी जाती है कि याचिका सुनवाई के सूचीबद्ध नहीं होता। वह वर्षों तक वैसे ही डिफॉल्ट याचिका के रूप में पड़ा रहता है। उधर विभाग की मिली भगत से प्रभावित अधिकारी, कर्मचारी या व्यक्ति हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में प्रोन्नति या अन्य लाभ नहीं मिलने पर अवमानना याचिका दायर कर देता है। अवमानना याचिका दायर होते ही विभाग अचानक सक्रिय हो उठता है। फिर आनन-फानन में प्रोन्नति देने की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है। और मिलीभगत का यह खेल अंजाम तक पहुंच जाता है।

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