द फॉलोअप डेस्कः
आज सीएम चंपाई सोरेन गिरिडीह में अबुआ आवास योजना के तहत स्वीकृति पत्र वितरण करने पहुंचे थे। साथ ही साथ आवास की पहली किस्त भी लाभुकों के खातों में जारी की गई। इस दौरान उन्होने कहा कि आज हम अबुआ आवास की चर्चा कोयलांचल क्षेत्र में कर रहे हैं। इस क्षेत्र की क्या स्थिति है यहां के कोयले का कहां-कहां उपयोग है ये सब हमें समझने का मौका मिला। इसी धरती में आज हम अबुआ आवास 35 हजार लाभुकों से हम शुरुआत कर रहे हैं। ये वो कोयलांचल है जो इस धरती है एक बोकारो जिले में बहुत बड़ा स्टील प्लांट है लेकिन यहां के आदिवासी, मूलवासी की आर्थिक व्यवस्था क्या है, शैक्षाणिक व्यवस्था क्या है यह किसी से छिपा नहीं है।

हेमंत सोरेन ने देखा कि झारखंड खनिज संपदा भरा हुआ है इसके बावजूद भी यहां बुनियादी सुविधाओं की कमी है। झारखंड के लोगों का किसी ने साथ नहीं दिया। पहले हम सुनते थे इंदिरा आवास, फिर पीएम आवास, पीएम आवास का ढिंढोरा खूब पीटा गया। कहता था 2022 तक सबको पक्का मकान दे देंगे। लेकिन यहां के साथ सौतेला व्यवहार किया गया। 8 लाख नाम सूची में थे पीएम आवास में। हेमंत बाबू ने कई बार पत्राचार किया कि हमको पैसा दीजिए। 1 लाख तीस हजार में मात्र 80 हजार उनको देना था लेकिन केंद्र सरकार ने नहीं दिया। तब जाकर हेमंत बाबू ने सोचा कि हम अपने लोगों को अपने बल पर अबुआ आवास देंगे। जिस धरती के कोयले से पूरा देश उजाला है। यहां का कोयला का उपयोग महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली ने किया है। लेकिन उस राज्य की हालत क्या है लोगों के पैर में गर्मी में चप्पल नहीं है, ठंड में बदन में गर्म कपड़े नहीं है।

सरकार आपके द्वारा कार्यक्रम से 29 लाख आवेदन आया। जिसमें 20 लाख लोगों की सूची को हमने स्वीकार कर लिया है। आज इस मंच से मैं कहना चाहता हूं कि तीन महीने के बाद 9 लाख अबुआ आवास एक साथ दिया जाएगा। ये तो शुरूआत है। हमारा हेमंत सोरेन ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का दर्द देखा। वह लोगों का दुख दर्द समझता है। वो गांव-गांव घूमकर देखता था कि आज झारखंड क्यों कमजोर है। पहले पेंशन में एक सीमा था लेकिन हमने वो खत्म कर दिया। ठंडा में लोगों के बदन में कपड़ा नहीं था,गर्मी में पैर में चप्पल नहीं था तब जाकर हमने सर्वजन पेंशन योजना शुरू किया। सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के तहत सभी पदाधिकारी गांव-गांव में गये। ये देश का पहला राज्य है जहां इस तरह से लोगों की बात घर-घर जाकर सुनी। जनादेश मिला हेमंत बाबू के नाम पर। लेकिन सरकार बनने के साथ ही कभी स्थिर से नहीं रहने दिया। केंद्रीय एजेंसी का हम भी सम्मान करते हैं लेकिन ऐसा भेदभाव नहीं होना चाहिए। जिस व्यक्ति का किसी खाता बही में नाम तक नहीं है उसे जेल भेज दिया गया। इसलिए हेमंत बाबू ने यहां की बुनियाद समस्या को पकड़ लिया था। कि हम अगर झारखंड को आगे की ओर ले जाएंगे तो हमें पहले ग्रामीण व्यवस्था को ठीक करेंगे। पहले सबको पेंशन देकर दो रोटी दिलवाने का काम करेंगे। उसके बाद पक्का मकान देंगे। उसके बाद पूरे राज्य में पाइपलाइन का जाल बिछा देंगे। इसलिए भाजपा वालों ने देखा कि हम अगर गांव जाएंगे तो क्या दिखाएंगे। ये लोग षडयंत्र किया। ऐसा एजेंसी आ जाए कि यहां के आदिवासी मूलवासी का जमीन लौटा दे। झूठा मुकदमा से जेल यात्रा पर हेमंत सोरेन हैं।

इसलिए झारखंड की जनता केंद्रीय एजेंसी पर सवाल खड़ा करती है। एजेंसी स्वतंत्र रूप से काम करे हम सम्मान करेंगे। लेकिन भेदभाव नहीं। जो आरोपी भाजपा में चले जाते हैं वह वाशिंग मशीन में धुलकर निकलते हैं। क्या विडंबना है। भीमराव अंबेडर ने सभी समुदाय को सम्मान रूप से देखने को कहा है। क्या इसी दिन को देखने को देखने के लिए उन्होंने भारत की आजादी की लड़ाई लड़ी। केंद्र सरकार ने एजेंसी का दुरुपयोग करके अपने दल को सत्ता पर काबिज किया। हम घोषणा करते हैं कि आज से 50 साल वालों को आवेदन लिया जाएगा। ये युवा सम्राट हेमंत बाबू का सोच था। हमलोग धनी प्रदेश में जन्म लिए हैं। ये सरकार ने 125 यूनिट बिजली 30 लाख परिवार के लिए फ्री कर दिया। हमें पार्ट-1 पार्ट-2 कहा जाता है। इसलिए जो बाकि है पार्ट 2 के रूप में हम करेंगे। पार्ट 2 के तहत हम काम करेंगे। इस सरकार ने 5-6 हजार स्कूल को बंद किया था। हम गुरुजी क्रे़डिट कार्ड के तहत पैसा देंगे। आप पढ़ाई मत छोड़ना। हम गरीब परिवार के घर में शिक्षा का दिया जालाएंगे। भाजपा ने सबसे ज्यादा राज किया। लेकिन क्या दिया।
हमारी सरकार ने गरीबों को रोटी, कपड़ा और मकान उपलब्ध कराने का कार्य किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार प्रारंभ के दिनों से ही झारखंड के आदिवासी, मूलवासी, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक सभी वर्गों को रोटी कपड़ा और मकान उपलब्ध कराने का कार्य कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के कई नीतिगत निर्णय का लाभ यहां के गरीब, मजदूर, किसान सहित सभी वर्ग को मिल रहा है।
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