गुमला
गुमला जिले में किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है. उपायुक्त दिलेश्वर महतो के नेतृत्व में कृषि विभाग, भूमि संरक्षण विभाग और उद्यान विभाग के माध्यम से किसानों तक विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है, ताकि वे अपनी खेती को बेहतर बनाकर आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें. उपायुक्त स्वयं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर किसानों से सीधा संवाद करते हैं और उन्हें पलायन छोड़कर स्थानीय स्तर पर कृषि से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं. दिलेश्वर महतो इससे पहले उप विकास आयुक्त के रूप में भी ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं. वे किसानों को समझाते रहे हैं कि दूसरे राज्यों में मजदूरी करने की बजाय सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने गांव में ही सम्मानजनक जीवन जिया जा सकता है. उनके इस प्रयास का सकारात्मक असर अब देखने को मिल रहा है, जहां कई किसान खेती के जरिए अपनी पहचान बना रहे हैं.

लाखों रुपये कमा रहे किसान
इसी क्रम में गुमला जिले के प्रगतिशील किसान जंबुआ लकड़ा और अमला भालेरिया लकड़ा ने तरबूज की खेती कर एक मिसाल पेश की है. पहले ये दोनों अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए दूसरे राज्यों में मजदूरी करते थे, जिससे जीवनयापन तो हो जाता था, लेकिन परिवार और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी. बाद में इन्होंने कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने का निर्णय लिया. इस दौरान इनका संपर्क भूमि संरक्षण पदाधिकारी आशीष प्रताप से हुआ, जिन्होंने उनकी लगन को देखते हुए सरकारी योजना के तहत सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई. इसके बाद जंबुआ लकड़ा ने अपनी परती पड़ी जमीन पर पिछले तीन वर्षों से तरबूज की खेती शुरू की. उन्नत तकनीक और जैविक तरीकों के उपयोग से उन्हें अच्छी पैदावार मिली और आय में लगातार वृद्धि हुई. शुरुआती सफलता के बाद उनका उत्साह बढ़ा और उन्होंने बड़े पैमाने पर खेती शुरू कर दी. आज वे अपनी खेती से लाखों रुपये कमा रहे हैं और अपने बच्चों को शहर में बेहतर शिक्षा दिला रहे हैं. उनका कहना है कि अब उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और वे सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं. उन्होंने इस सफलता के लिए जिला प्रशासन और विशेष रूप से भूमि संरक्षण पदाधिकारी आशीष प्रताप का आभार जताया है. वहीं, आशीष प्रताप ने बताया कि सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन कुछ ही किसान उनका पूरा लाभ उठा पाते हैं. ऐसे उदाहरणों से अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिलती है. उन्होंने कहा कि यदि किसान ईमानदारी से मेहनत करें, तो जिले में पलायन की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि जिन गांवों से सिंचाई सुविधा की मांग आती है, वहां पहले टीम द्वारा स्थल निरीक्षण कराया जाता है, फिर स्वयं जाकर योजनाओं को धरातल पर लागू किया जाता है. इसका ही परिणाम है कि आज गुमला के कई किसान समृद्ध बनकर उभर रहे हैं और उनकी पहचान अब राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बन रही है.
