द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में नगर निकाय चुनाव भले ही दलीय आधार पर नहीं हो रहे हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपने-अपने समर्थित उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी कार्यकर्ता पार्टी लाइन के खिलाफ काम करेगा, उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। गढ़वा नगर परिषद चुनाव को लेकर पार्टी ने सख्त रुख अपनाया है। राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा ने भाजपा के वरिष्ठ नेता अलखनाथ पांडेय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जानकारी के अनुसार, यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो उन्हें पार्टी से स्वतः निष्कासित किया जा सकता है। गढ़वा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने स्पष्ट कहा है कि नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए पार्टी समर्थित उम्मीदवार कंचन जायसवाल हैं। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं का दायित्व है कि वे अधिकृत उम्मीदवार के पक्ष में मतदान की अपील करें। यदि कोई कार्यकर्ता दूसरे प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा नेतृत्व का कहना है कि भले ही चुनाव गैर-दलीय आधार पर हो रहे हों, लेकिन पार्टी की प्रतिष्ठा और संगठनात्मक एकता सर्वोपरि है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में चुनावी माहौल गरम है और विभिन्न दलों के समर्थक अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में सक्रिय हैं। भाजपा का यह कड़ा संदेश साफ संकेत देता है कि पार्टी अंदरूनी गुटबाजी को लेकर सतर्क है और अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में एकजुटता दिखाना चाहती है। लेकिन सवाल यह खड़ा हो रहा है कि कांग्रेस की तर्ज पर भाजपा भी तत्काल कार्रवाई करने से क्यों बच रही है। जब बागी के रूप में भाजपा के नेता चुनावी मैदान में खड़े हैं, तो उन्हें प्रमाण की आवश्यकता क्यों है।
