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JSSC ने संथाली भाषा के अभ्यर्थियों के साथ किया अन्याय! मैट्रिक लेवल की परीक्षा में पूछा UPSC का सवाल

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सन्नी शारद, द फॉलोअप:

JSSC यानी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग कोई परीक्षा आयोजित करे और उसमें कोई विवाद न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। फिलहाल विवाद फील्ड वर्कर परीक्षा को लेकर शुरू हुआ है। संथाली भाषा के अभ्यर्थियों का आरोप है कि संथाली भाषा के पेपर में 40 सवाल आउट ऑफ सिलेबस पूछे गए, जबकि 4 सवालों के उत्तर ही गलत थे।

JSSC में अभ्यर्थियों ने दर्ज कराई आपत्ति
आज 22 जुलाई को सैकड़ों की संख्या में संथाली भाषा के छात्र JSSC कार्यालय पहुंचे। 5 छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने आयोग को बताया कि संथाली भाषा के अभ्यर्थियों के साथ किस तरह अन्याय हुआ है।

JSSC के सचिव ने दिया है आश्वासन
सचिव से मिलने के बाद बाहर निकलकर अभ्यर्थियों ने द फॉलोअप से बातचीत में बताया कि उन्होंने सचिव को जानकारी दी कि 100 में से 40 सवाल आउट ऑफ सिलेबस पूछे गए थे और 4 प्रश्नों के उत्तर अमान्य (इनवैलिड) थे। अभ्यर्थियों के अनुसार, सचिव ने फिलहाल उन्हें आश्वासन दिया है कि उत्तर कुंजी (आंसर-की) जारी होने के बाद आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञों (एक्सपर्ट) की टीम के साथ बैठकर मामले की समीक्षा की जाएगी।

सवाल पूछा गया-  महुआ को संस्कृत में क्या कहते हैं?
अभ्यर्थियों ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि फील्ड वर्कर परीक्षा में 3 पेपर थे। इनमें एक भाषा का पेपर था, जिसमें संथाली भाषा के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ। उन्होंने बताया कि एक सवाल पूछा गया था- महुआ को संस्कृत में क्या कहते हैं? जबकि सवाल यह होना चाहिए था कि महुआ को संथाली में क्या कहते हैं?
अभ्यर्थियों का कहना है कि कई ऐसे सवाल पूछे गए, जो UPSC और UGC स्तर की परीक्षाओं के सिलेबस में शामिल होते हैं। उनका कहना था कि यदि ऐसे ही प्रश्न पूछने थे, तो फिर परीक्षा का सिलेबस जारी ही नहीं करना चाहिए था।

परीक्षा रद्द नहीं हुई तो आगे आंदोलन की चेतावनी
झारखंड के विभिन्न जिलों से पहुंचे संथाली भाषा के अभ्यर्थियों ने बताया कि वे कुछ दिन तक इंतजार करेंगे। इसके बाद भी यदि उनकी शिकायतों पर सुनवाई नहीं हुई और परीक्षा रद्द नहीं की गई, तो वे पहले मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलेंगे। यदि इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उग्र आंदोलन करेंगे।

कम उपस्थिति और एडमिट कार्ड में देरी पर सवाल
बता दें कि झारखंड में 19 जुलाई को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा झारखंड फील्ड वर्कर प्रतियोगिता परीक्षा (JFWCE-2024) का आयोजन किया गया था। यह परीक्षा 510 पदों के लिए आयोजित हुई थी। परीक्षा में केवल 26 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी।

इसके अलावा यह भी सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा के दिन तक, जबकि कुछ को परीक्षा समाप्त होने के बाद भी एडमिट कार्ड प्राप्त हुए। हालांकि, आयोग का कहना था कि उसकी वेबसाइट पर पहले ही परीक्षा की सूचना जारी कर दी गई थी और एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया था। यदि कोई अभ्यर्थी अपना रजिस्ट्रेशन नंबर भूल गया था, तो उसके लिए भी अलग विकल्प दिया गया था। इसके बावजूद कई अभ्यर्थियों ने शिकायत की कि वेबसाइट का लिंक अंतिम दो दिनों में ठीक से काम नहीं कर रहा था।

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