जमशेदपुर:
धालभूमगढ़ थाना के तात्कालीन प्रभारी पुलिस अवर निरीक्षक पवन कुमार के खिलाफ की गयी शिकायत की जांच में गठित 4 सदस्यीय इंटरनल कम्प्लेंट कमिटी ने आरोपों को प्रमाणित नहीं माना है। कमेटी ने उपलब्ध दस्तावेज, गवाहों के बयान, तकनीकी एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य पहलुओं के विस्तृत परीक्षण के बाद पवन कुमार को मामले में दोषमुक्त किया जाना न्यायोचित और तर्कसंगत माना है। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि आरोपों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष, स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं पाया गया।

4 सदस्यीय कमिटी में ये पुलिस पदाधिकारी शामिल
मामले की जांच के लिए गठित 4सदस्यीय कमेटी में घाटशिला महिला थाना प्रभारी मंजूषी कुंकल, साकची महिला थाना प्रभारी रूपा पाल, पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय-1 भोला प्रसाद सिंह और पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय रेल ज्योति कुंवर शामिल थीं। कमेटी ने उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों, गवाहों के कथनों, तकनीकी विश्लेषण और परिस्थितिजन्य पहलुओं का समेकित मूल्यांकन करने के बाद अपनी राय दी।
आरोपों के समर्थन में प्रत्यक्ष, स्वतंत्र साक्ष्य नहीं मिला
रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व जांच प्रतिवेदन में घटना को प्रथम दृष्टया सत्य प्रतीत होने का उल्लेख किया गया था, लेकिन विस्तृत और गहन जांच के दौरान इसकी पुष्टि के लिए ठोस एवं स्वतंत्र साक्ष्य नहीं मिल सके। कमेटी के अनुसार आरोपों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष, स्वतंत्र एवं विश्वसनीय साक्ष्य सामने नहीं आया। उपलब्ध तकनीकी, अभिलेखीय और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाये गये।
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पीड़िता ने बहकावे में शिकायत करने की बात कबूली
जांच के दौरान सामने आयी ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर भी कमेटी ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित पदाधिकारी की ओर से प्रस्तुत ऑडियो रिकॉर्डिंग में शिकायतकर्ता द्वारा किसी के प्रभाव अथवा बहकावे में आकर आरोप लगाये जाने की बात स्वीकार किये जाने का उल्लेख है। कमेटी ने हालांकि ऐसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के मूल्यांकन में सावधानी की आवश्यकता बतायी है और कहा है कि इस तरह के साक्ष्य की मौजूदगी मात्र से शिकायत की स्वतंत्रता, स्वप्रेरणा और निष्पक्षता के संबंध में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
कमेटी ने यह भी उल्लेख किया कि यदि आरोपित घटनाएं वास्तव में आरोपित रूप में हुई होतीं, तो उनके समर्थन में कुछ प्रत्यक्ष, परिस्थितिजन्य अथवा अभिलेखीय साक्ष्य का उपलब्ध होना स्वाभाविक था। लेकिन जांच में ऐसा कोई पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिला, जिससे आरोपों की पुष्टि की जा सके। उपलब्ध साक्ष्यों को आरोपों से परे प्रमाणित करने के लिए भी पर्याप्त नहीं माना गया।
थाना प्रभारी के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं
सभी तथ्यों और साक्ष्यों के वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन के बाद कमेटी ने स्पष्ट राय दी कि तत्कालीन धालभूमगढ़ थाना प्रभारी पवन कुमार के विरुद्ध लगाये गये आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं। रिपोर्ट में उन्हें इस मामले में दोषमुक्त किया जाना न्यायोचित एवं तर्कसंगत बताया गया है। यानी, उपलब्ध जांच रिपोर्ट के अनुसार, पवन कुमार के खिलाफ लगाये गये आरोपों को पुष्ट करने वाला पर्याप्त स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य जांच कमेटी को नहीं मिला और इसी आधार पर कमेटी ने उन्हें मामले से दोषमुक्त किये जाने की राय दी।
पुलिस अवर निरीक्षक पवन कुमार ने कहा कि मुझे षड्यंत्र के तहत इस मामले में फंसाया गया था। चार सदस्यीय जांच कमेटी के पास उपलब्ध साक्ष्य में स्वयं आरोप लगाने वाली महिला सिपाही ने स्वीकार किया कि किसी के बहकावे में आकर उसने मेरे खिलाफ आवेदन दिया था। हालांकि, उसने उस व्यक्ति का नाम बताने में असमर्थता जतायी। कमेटी ने पूरे मामले की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके आधार पर मुझे आरोपों से दोषमुक्त किया गया है।