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Ukraine Crisis : जब तक बेटी फ्लाइट में नहीं बैठती मैं खाना नहीं खाऊंगी, यूक्रेन में फंसी छात्रा की मां की व्यथा

जब तक बेटी फ्लाइट में नहीं बैठती मैं खाना नहीं खाऊंगी, यूक्रेन में फंसी छात्रा की मां की व्यथा

धनबाद: 

झारखंड के भी सैकड़ों छात्र यूक्रेन में फंसे हैं। सरकार लगातार अपने राज्य के लोगों की वापसी के लिए काम कर रही है लेकिन अभी भी कई लोग हैं जो यूक्रेन में फंसे है। उन्हीं में से एक धनबाद की सौम्या हेजल टोपनो भी हैं। सौम्या के पिता पॉल एजे टोपनो लगातार सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि उनकी बेटी को वापस ला दो।

 

बेटी जब तक वापस नहीं

आती चिंता रहेगी
पिता कह रहे हैं कि जब तक बेटी वापस नहीं आ जाती तब तक उनकी चिंता खत्म नहीं होगी। वह काफी परेशान हैं। पिता ने बताया है कि मंगलवार को उनकी बेटी के साथ फोन पर 11 बजे बात हुई थी। उसने बताया कि अभी सुरक्षित जगह पर एक कैंप में है और खाने-पीने की भी व्यवस्था ठीक है। हालांकि वह शाम तक रोमानिया के एयरपोर्ट पहुंच गई। 

कॉलेज ने जाने की इजाजत दी 
पिता ने बताया कि सौम्या तीसरे वर्ष की छात्रा है, इसलिए उसे परीक्षा देने के लिए रूकना पड़ गया था। पहले सिर्फ प्रथम और दूसरे साल के छात्रों को लौटने की इजाजत थी। लेकिन अब युद्ध बढ़ता जा रहा है इसलिए कॉलेज भी कह रहा है कि आप सब अपने वतन लौट जाएं। पॉल एजे टोपनो ने बताया कि रूस का आक्रमण शुरू होने के बाद से सौम्या समेत तमाम स्टूडेंट को संस्थान से बाहर निकलने की छूट नहीं थी।

 

रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट पहुंची
जब संस्थान प्रशासन ने स्वदेश लौटने की छूट दी, तो उसे वहां रविवार को एक दिन का वक्त मिल गया। जिसमें सौम्या ने खाने-पीने की चीजें खरीद लीं। और उसी रात वहां से निकल पड़ी और 1300 किमी का सफर कर मंगलवार को रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट के एयरपोर्ट के पास पहुंची। 

 

सौम्या की मां ने खाना-पीना छोड़ दिया है
झारखंड सरकार के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर पॉल एजे टोपनो ने अपनी बेटी और उसके संस्थान के बारे में पूरी जानकारी दी थी। इधर, सौम्या की मां ने खाना-पीना छोड़ रखा है। वह टीवी खोलने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रही है। वह बार-बार कह रही है कि जब तक उनकी बच्ची फ्लाइट में नहीं बैठ जाती, तब तक खाना  नहीं खाएंगी। परिजन उन्हें लगातार हौसला दे रहें हैं।