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हांगकांग में भीषण अग्निकांड, 44 की मौत; सैकड़ों लापता, तीन लोग गिरफ्तार

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द फॉलोअप डेस्क
हांगकांग के ताई पो जिले के एक विशाल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में बुधवार दोपहर अचानक लगी भीषण आग ने भारी तबाही मचा दी। गगनचुंबी इमारतों में फैली इस आग ने देखते ही देखते कई अपार्टमेंट ब्लॉकों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में कम से कम 44 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। आग इतनी भयावह थी कि दमकलकर्मियों को ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों तक पहुंचने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आग लगभग 16 घंटे तक धधकती रही। राहत दल सबसे ज्यादा प्रभावित तीन टावरों पर ध्यान केंद्रित किए हुए थे, जबकि चार अन्य इमारतों में आग पर आंशिक रूप से काबू पा लिया गया था। बताया जा रहा है कि कॉम्प्लेक्स के आठ में से सात टावरों में बुजुर्गों की संख्या अधिक थी, जिससे हताहतों की चिंता और बढ़ गई।

अधिकारियों ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में कई अपार्टमेंट की खिड़कियों पर ज्वलनशील पॉलीस्टाइनिन बोर्ड लगे मिले, जिन पर एक निर्माण कंपनी का नाम अंकित था। माना जा रहा है कि ये बोर्ड आग को तेजी से फैलाने में बड़ी वजह बने। इसके अलावा, साइट पर मिले सुरक्षात्मक जाल, कैनवस और प्लास्टिक कवरिंग पर भी संदेह जताया जा रहा है कि वे जरूरी सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। फायर सर्विसेज के निदेशक एंडी येउंग ने बताया कि खिड़कियों पर आग पकड़ने वाले बोर्ड देखकर उनकी टीम हैरान रह गई। उन्होंने कहा कि मामला गंभीर है, इसलिए आगे की जांच के लिए इसे पुलिस को सौंप दिया गया है।

घटना के सिलसिले में एक निर्माण कंपनी के दो निदेशकों और एक कंसल्टेंट को गिरफ्तार किया गया है। हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव जॉन ली ने कहा कि हाउसिंग अथॉरिटी यह भी जांच करेगी कि इमारतों पर लगी प्रोटेक्टिव लेयर आग से सुरक्षा के लिए पर्याप्त थी या नहीं। उन्होंने आश्वस्त किया कि दोषियों को कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। विशेषज्ञ यह भी जांच रहे हैं कि क्या बांस के मचान (बैंबू स्कैफोल्डिंग) ने आग को तेजी से फैलाने में भूमिका निभाई। हांगकांग में पहले भी ऐसे मामलों में बांस के ढांचे को आग फैलने का कारण माना गया है। इसे हालिया दशकों की सबसे भीषण आग माना जा रहा है, जिसने 1996 की कुख्यात गार्ले बिल्डिंग आग की त्रासदी को भी पीछे छोड़ दिया, जिसमें 41 लोगों की मौत हुई थी।