रांची:
झारखंड(Jharkhand) में पदस्थापित बिहार(Bihar) के कर्मियों के लिए खुशखबरी है। कैडर विभाजन के बाद बिहार से आये आरक्षित वर्ग (reserved category) के कर्मियों के बच्चों को झारखंड में आरक्षण दिया जाएगा। आरक्षित श्रेणी के एसटी(ST), एससी(SC), अत्यंत पिछड़े वर्ग, पिछड़ा वर्ग से झारखंड राज्य में पदस्थापित हुए कर्मी जो बिहार के निवासी रहे हों, तब भी उनकी आरक्षण श्रेणी की मान्यता झारखंड में अब प्रदान की जायेगी। कार्मिक प्रशासनिक सुधार राजभाषा विभाग ने इस संबंध में संकल्प जारी कर दिया है।

अगर झारखंड में लिया तो बिहार में नहीं ले पाएंगे लाभ
बता दें कि झारखंड में आरक्षण का लाभ ले रहे बच्चों को अपने मूल राज्य बिहार में इस इसका का लाभ नहीं लेना होगा। जिसके लिए लाभुकों को एक शपथ पत्र भरकर बिहार के संबंधित जिले को पूरी सूचना देनी होगी। अगर किसी ने दोनों राज्यों से आरक्षण का लाभ लिया तो इसे गैर कानूनी माना जायेगा।
बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा-73 आधार
कार्मिक विभाग ने सिविल अपील में पंकज कुमार ने यह स्पष्ट किया है कि झारखंड राज्य में आरक्षण का दावा करने पर बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा-73 से आच्छादित कर्मियों तथा उनके संतानों को झारखंड में आरक्षण का लाभ अनुमान्य होगा। साथ ही साथ अधिनियम की धारा-73 से आच्छादित कर्मियों के राज्य गठन के बाद सेवानिवृत होने के बाद उनके संतानों द्वारा आरक्षण का दावा करने पर भी आरक्षण का लाभ अनुमान्य होगा।

14 अगस्त 2008 को निकाले गये सर्कुलर में स्पष्टिकरण
दरअसल, कार्मिक विभाग के 14 अगस्त 2008 को निकाले गये सर्कुलर में यह स्पष्ट किया गया है कि वैसे सरकारी कर्मी,जो राज्य गठन के पूर्व आरक्षित श्रेणी में विमुक्त हुए हैं और संवर्ग विभाजन के आधार पर झारखंड राज्य में पदस्थापित किए गये हैं। इसके साथ वे बिहार के निवासी है, उनकी आरक्षण श्रेणी अप्रभावित रहेगी और ये आरक्षित श्रेणी के सरकारी कर्मी माने जायेंगे। फिलहाल इस सर्कुलर का अनुपालन मात्र अनुसूचित जनजाति तथा अनुसूचित जाति के सरकारी सेवकों को प्रमोशन का लाभ प्रदान करने के क्रम में अनुमान्य किया जाता रहा है। बिहार राज्य के निवासी जो आरक्षित श्रेणी में झारखंड गठन से पूर्व नियुक्त हुए थे उन्हें सीधी नियुक्ति में उपरोक्त लाभ की अनुमान्यता नहीं की जाती है।
