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सत्ता और सचिवालय का सच : रिम्स-2 में हो रहा खेला

रिम्स-2 में हो रहा खेला

जीतेंद्र कुमार:
Ranchi: राज्य के मेडिकल कॉलेजों (Medical College) और अस्पतालों में भले ही चिकित्सा व्यवस्था खुद बेड पर हो, पारा मेडिकल (Para Medical)कर्मियों की कमी हो, आवश्यक मेडिकल उपकरण (Medical Equipment) नदारद हों, लेकिन नए अस्पताल भवनों के निर्माण को लेकर स्वास्थ्य विभाग (Health Department) पीछे नहीं है। उसकी प्राथमिकता चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त करने के बदले नए भवनों के निर्माण पर ज्यादा है। इसका उदाहरण एक बार फिर दिखाई पड़ने लगा है। रिम्स-2  (Rims-2) के निर्माण को लेकर झारखंड भवन निर्माण निगम ने टेंडर फ्लोट (Tender Float) कर दिया है।

2500 करोड़ के टेंडर में कंपनी को लेकर चर्चा
इसमें तीन कंपनियों ने टेंडर डाला है। दिलचस्प यह है कि झारखंड निर्माण के बाद अब तक के हुए सबसे बड़े इस टेंडर में किस कंपनी को काम मिलेगा, इसकी चर्चा निगम और सरकार के शीर्ष पर बैठे लोग अभी से कर रहे हैं। बता रहे हैं कि लगभग 2500 करोड़ के इस टेंडर में हैदराबाद की वही कंपनी फिर सफल हो सकती है, जिसने स्मार्ट सिटी परिसर में हमारे माननीयों के लिए बंगलों का निर्माण कराया है। खेल जारी है, सेटिंग का काम अंतिम चरण में है। इससे जुड़े बड़े अधिकारियों और अभियंताओं को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। उन्हें निर्देशित कर दिया गया है कि इस कंपनी को कैसे काम मिले, यह सुनिश्चित कर देना ही उनकी भविष्य में होने वाली बेहतर पोस्टिंग का आधार बनेगा। इसके बाद से पूरा कुनबा उसी कंपनी को एल-1 घोषित कराने में तत्परता से जुटा हुआ है।

बंगला निर्माण के टेंडर का पुराना खेल फिर चर्चा में
लेकिन इस क्रम में माननीयों के बंगला निर्माण के क्रम में हुए टेंडर के समय एल-1 हुई कंपनी पर दबाव बनाकर किस तरह से हैदराबाद की उसी कंपनी को काम आवंटित किया गया था, बेताल रूपी वह खेल बाहर निकल आया है। जानकार उस खेल को सार्वजनिक करने के लिए सक्रिय हो उठे हैं। निगम के जानकार बता रहे हैं कि राज्य के इस बड़े टेंडर में इस बार उसी कंपनी पर मेहरबानी हुई तो विस्फोट होगा। देखना है कि इस विस्फोट में कौन-कौन घायल होते हैं, किसको कम चोट लगती है और किसका ब्रेन हेमरेज होता है।

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