रांची:
Ranchi News: झारखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, तकनीक आधारित और डिजिटल रूप से समृद्ध बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों में डिजिटल स्टूडियो और जेन-टॉक्स पॉडकास्ट रूम स्थापित किए जाएंगे। वहीं, अंगीभूत कॉलेजों की एक-एक कक्षा को पूरी तरह इंटरैक्टिव स्मार्ट क्लासरूम के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शैक्षणिक सामग्री तैयार करना, तकनीकी सुविधाओं का विस्तार करना और विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण व्यवस्था से जोड़ना है। इसके लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने संबंधित विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार को आधिकारिक पत्र जारी किया है। परियोजना को धरातल पर उतारने से पहले विश्वविद्यालयों में उपलब्ध आधारभूत संरचना का तकनीकी सर्वेक्षण और निरीक्षण भी कराया जाएगा।

डिजिटल शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में राजकीय विश्वविद्यालयों में डिजिटल स्टूडियो और जेन-टॉक्स पॉडकास्ट रूम स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इन सुविधाओं के माध्यम से शैक्षणिक सामग्री तैयार करने, व्याख्यान रिकॉर्ड करने और डिजिटल माध्यमों से विद्यार्थियों तक अध्ययन सामग्री पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाया जा सकेगा।
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कॉलेजों में विकसित होंगे इंटरैक्टिव स्मार्ट क्लासरूम
योजना के तहत राज्य के प्रत्येक अंगीभूत कॉलेज में एक कक्षा को पूरी तरह इंटरैक्टिव स्मार्ट क्लासरूम के रूप में विकसित किया जाएगा। आधुनिक तकनीकी उपकरणों से लैस इन कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाई का बेहतर अनुभव देने की तैयारी है। इसका उद्देश्य पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था के साथ डिजिटल तकनीक का समन्वय स्थापित करना और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
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अकादमिक सामग्री निर्माण और एलएमएस को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने सी-डैक (C-DAC) के सहयोग से लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) तैयार किया है। इस प्रणाली के प्रभावी उपयोग और विश्वविद्यालय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट तैयार करने के उद्देश्य से आधुनिक डिजिटल स्टूडियो स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसके माध्यम से शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों को डिजिटल अध्ययन सामग्री के निर्माण में सहायता मिलेगी। साथ ही, विद्यार्थियों को ऑनलाइन और डिजिटल माध्यमों से गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
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26 से 30 अक्टूबर तक विश्वविद्यालयों का होगा निरीक्षण
परियोजना को लागू करने से पहले तकनीकी सर्वेक्षण और आधारभूत संरचना की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की पहल के तहत ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (बीईसीआईएल) की तकनीकी टीम 26 से 30 अक्टूबर तक राज्य के विभिन्न राजकीय विश्वविद्यालयों का दौरा करेगी। टीम विश्वविद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं का भौतिक निरीक्षण करेगी और डिजिटल स्टूडियो व स्मार्ट क्लासरूम स्थापित करने की संभावनाओं का आकलन करेगी।

किस दिन किन विश्वविद्यालयों का होगा दौरा
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 26 अक्टूबर को रांची विश्वविद्यालय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय और झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय का स्थल सर्वेक्षण किया जाएगा। 27 अक्टूबर को विनोबा भावे विश्वविद्यालय का निरीक्षण होगा। वहीं, 28 अक्टूबर को कोल्हान विश्वविद्यालय और जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी का दौरा किया जाएगा। जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी के लिए बिष्टुपुर स्थित परिसर का निरीक्षण निर्धारित है। इसके बाद 29 अक्टूबर को विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय और 30 अक्टूबर को सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के दुमका परिसर का दौरा किया जाएगा। इस दौरान विश्वविद्यालयों में डिजिटल सुविधाओं के विकास के लिए जरूरी तकनीकी संसाधनों और आधारभूत संरचना की स्थिति का आकलन किया जाएगा।

विश्वविद्यालयों को नियुक्त करना होगा नोडल अधिकारी
तकनीकी सर्वेक्षण की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए विश्वविद्यालयों को अपने संस्थान से एक नोडल अधिकारी नामित करने का निर्देश दिया गया है। यह अधिकारी बीईसीआईएल की तकनीकी टीम के साथ समन्वय स्थापित करेगा और निरीक्षण से संबंधित आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराने में सहयोग करेगा।
निरीक्षण के बाद तैयार होगी परियोजना रिपोर्ट
तकनीकी टीम भौतिक निरीक्षण, तकनीकी अध्ययन और जरूरतों के आकलन के आधार पर विभाग को परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालयों में डिजिटल स्टूडियो, पॉडकास्ट रूम और स्मार्ट क्लासरूम स्थापित करने की आगे की प्रक्रिया तय करने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार की इस पहल से उच्च शिक्षा संस्थानों में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।