logo

Followup Special News

साबरमती का संत-44: बापू ने कहा था-भारत हिन्दू इंडिया नहीं और न कांग्रेस केवल हिन्दुओं का संगठन

गांधी ने कहा-भारत का विभाजन दो सार्वभौम इलाकों का विभाजन है। मूल भारत को दो राष्ट्र क्यों समझा जाए।

जम्मू-कश्मीर में आतंकी क्यों बना रहे हैं आम नागरिकों को निशाना! पढ़िये घाटी के हालात का पूरा लेखा-जोखा

जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में तनाव और हिंसा की खबरें बीते कुछ समय से सुर्खियों में है। फरवरी 2020 से लेकर जुलाई 2020 तक जो यथास्थिति घाटी में बनी हुई थी वो अब भंग होती दिख रही है। विशेष तौर पर, बीते 1 माह में जम्मू कश्मीर के शोपियां, पुंछ, राजौरी, कुलग

एक फेसबुकिया पोस्ट ने आखिर कैसे समूचे बांग्लादेश को सांप्रदायिक हिंसा में झोंक दिया

आईएसआई प्रमुख हज़ारों मील दूर कोसोवो में हथियार भेजकर दंगे करवा सकता है, बांग्लादेश में इनके लिए क्या मुश्किल है।

साबरमती का संत-43: मौजू़दा हालातों में गांधी एक बेहतर और कारगर विकल्प

यह बात धीरे-धीरे दुनिया में गहराती जा रही है।

कहानी एक ऐसी पुरनूर शख्‍सियत की, जिसकी आमद में है जश्‍न मिलाद

जिस चीज़ में भी नरमी, रहम, दया, नम्रता होती है, वो इसे और खूबसूरत बना देती है।

साबरमती का संत-42: सभी धर्मों और जातियों की एकाग्रता के प्रतीक थे गांधी, मिलावट के नहीं

बस यही वह बिंदु था जो कुछ संकीर्ण विचारकों को पसंद नहीं आया।

वीर! -3 : सावरकर के माफीनामा की भाषा दीनता की चरम सीमा का स्पर्श

क्या स्वाधीनता संग्राम को गति देने के लिए सावरकर जेल से बाहर आना चाहते थे?

दस्‍तावेज़-2: अल्बर्ट आइंस्टीन के चर्चित लेख -समाजवाद क्‍यों- की अंतिम किस्‍त

यदि हम स्वयं से पूछें कि मानव जीवन को संभव रूप से ज्यादा से ज्यादा संतोषजनक बनाने के लिए समाज और आदमी की सांस्कृतिक दृष्टिकोण की संरचना को कैसे परिवर्तित किया जाना चाहिए

दस्‍तावेज़-1: अल्बर्ट आइंस्टाइन ने 72 साल पहले क्‍यों उठाया था समाजवाद का सवाल

'विश्व प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी अल्बर्ट आइंस्टीन का लेख समाजवाद क्यों? (Why Socialism?) मूल रूप से Monthly Review (मई 1949) के प्रथम अंक में प्रकाशित हुआ था। यह बाद में MR के पचासवें वर्ष को मनाने के लिए मई 1998 में भी प्रकाशित किया गया था।

साबरमती का संत-41: गांधी ने कहा था, मरीज की लाश को वेंटिलेटर पर डालकर गरीब परिवार का आर्थिक बलात्कार

संसार में केवल गांधी बोले थे कि वे रोज़ अपने को सुधारते हैं। पीढ़ियां और इतिहासकार उनकी आखिरी बात को सच मानें।

वीर! -2: क्या सावरकर की जीवन यात्रा को दो भागों में मूल्यांकित करना चाहिए

क्रांतिकारी गतिविधियों में संलिप्तता के कारण सावरकर को अंडमान की सेल्युलर जेल भेजा गया था

दख़ल: कांग्रेस की विचारधारा की रीढ़ है राष्ट्रवाद, एकजुट रहकर सामजिक बुराइयों से जूझना

विचारधारा किसी राजनीतिक पार्टी का ह्रदय स्थल है, उसमें मिलावट या हीला-हवाली की गुंजाइश नहीं होती।

Load More