द फॉलोअप डेस्क:
कॉमेडी फिल्म 'उड़ता तीर' (Udta Teer) अपनी अतरंगी कहानी और मजेदार अंदाज से दर्शकों को हंसाने की कोशिश करती है। निर्देशक आकाश ए. कौशिक (Akash A Kaushik Director) की इस फिल्म में कहानी एक इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी याददाश्त चली जाती है और वह खुद को दुश्मन के लिए काम करने वाला समझने लगता है। इसके बाद शुरू होता है गलतफहमियों, उलझनों और मजेदार घटनाओं का सिलसिला। फिल्म की खासियत यह है कि यह अपनी कहानी को गंभीर जासूसी थ्रिलर बनाने के बजाय कॉमेडी के रास्ते पर आगे बढ़ाती है। इसकी राइटिंग, चुटीले संवाद और किरदारों के बीच की नोकझोंक कई मौकों पर हंसने का मौका देती है। बैकग्राउंड म्यूजिक भी कॉमेडी के माहौल को बेहतर बनाने में मदद करता है।

आयुष्मान की कॉमिक टाइमिंग, सितारों का साथ
फिल्म में आयुष्मान खुराना अपने एनर्जी से भरे अभिनय और कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का ध्यान खींचते हैं। उनका अंदाज फिल्म के हल्के-फुल्के मिजाज के साथ अच्छी तरह मेल खाता है। सारा अली खान भी अपने किरदार के जरिए कॉमेडी के माहौल में फिट बैठती हैं। वहीं, राहुल बोस, राम कपूर, सुहैल नैय्यर और गुलशन ग्रोवर जैसे कलाकार कहानी में विविधता लाते हैं। दिवंगत मुकुल देव भी अजहर मकसूद के किरदार में अपनी छाप छोड़ते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसके संवाद और गलतफहमियों से पैदा होने वाली कॉमेडी है। हालांकि, कुछ जगहों पर हास्य का असर कम होता है, लेकिन कलाकारों का प्रदर्शन और फिल्म का अनोखा कॉन्सेप्ट इसे मनोरंजक बनाए रखते हैं।

कैसी है फिल्म, देखें या नहीं?
'उड़ता तीर' की कहानी में नयापन है, लेकिन इसका दूसरा हिस्सा थोड़ा और चुस्त होता तो फिल्म का प्रभाव बेहतर हो सकता था। कुछ दृश्यों में कहानी की रफ्तार धीमी पड़ती है, जिससे मनोरंजन का प्रवाह प्रभावित होता है। इसके बावजूद फिल्म अपने कॉमिक सीन्स और अजीबोगरीब परिस्थितियों के सहारे दर्शकों को बांधे रखने की कोशिश करती है। यह फिल्म उन दर्शकों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है, जिन्हें हल्की-फुल्की कॉमेडी, मजेदार संवाद और बिना ज्यादा दिमाग लगाए मनोरंजन करना पसंद है। कुल मिलाकर, 'उड़ता तीर' गंभीर जासूसी कहानी के बजाय हंसी और कन्फ्यूजन का तड़का लगाती है। अगर आप कुछ समय के लिए रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर होकर मनोरंजन करना चाहते हैं, तो यह फिल्म देख सकते हैं।