पटना:
बिहार में नई सरकार के शपथ ग्रहण (cabinet swearing-in) के दूसरे दिन से ही अपहरण केस को लेकर वारंट विवाद में घिरे बिहार के कानून मंत्री रहे कार्तिकेय सिंह (Kartikeya Singh) ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने गुरुवार को मीडिया से बातचीत ने कहा कि BJP नेताओं को एक भूमिहार का RJD कोटे से मंत्री बनना रास नहीं आया। उन्होंने कहा कि BJP ने उनके खिलाफ मीडिया ट्रायल करवाया । उन्होंने पार्टी की छवि धूमिल नहीं हो इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा दिया है। वे विभाग बदले जाने से सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) से नाराज नहीं हैं।

मुख्यमंत्री- उपमुख्यमंत्री का नाम खराब हो बर्दाश्त नहीं
उन्होंने कहा कि मेरी वजह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का नाम खराब हो, यह मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता, इसलिए मैंने इस्तीफा दे दिया। बीजेपी के रोज मीडिया ट्रायल से मैंने परेशान होकर इस्तीफा देना उचित समझा। कार्तिक ने कहा कि वह अच्छे परिवार से हैं। उनके पिता शिक्षक रहे हैं। वे खुद भी 27 सालों तक सरकारी स्कूल में शिक्षक रहे। उनके खिलाफ 2015 से पहले कोई आपराधिक मामला नहीं था। 2015 में जो अपहरण का मामला दर्ज हुआ, उससे भी उनका कोई लेना-देना नहीं है।
कोर्ट में सुनवाई पूरी
बता दें कि कार्तिकेय सिंह पर साल 2014 में पटना से सटे बिहटा में राजीव रंजन नाम के आदमी का आपहरण करने का आरोप है। जिसे लेकर आज मंत्री कार्तिक कुमार की दानापुर कोर्ट में पेशी थी। कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। उम्मीद जताई जा रही है कोर्ट शाम 4 बजे तक अपना सुना सकती है।

क्या है मामला
बता दें कि साल 2014 में पटना से सटे बिहटा में राजीव रंजन नाम के आदमी का अपहरण हुआ था। अपहरण के इस मामले में कार्तिकेय सिंह का भी नाम सामने आया था। उसी मामले में कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए कार्तिकेय के खिलाफ दानापुर कोर्ट ने वारंट जारी किया था। कार्तिकेय सिंह ने उस मामले में अभी तक ना तो कोर्ट के सामने सरेंडर किया हैं और ना ही जमानत के लिए अर्जी दी है। वहीं जिस दिन कार्तिकेय सिंह ने कानून मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया थी उस दिन उन्हें अपहरण केस के मामले में कोर्ट में सरेंडर करना था। लेकिन वह उस वक्त राजभवन में मंत्री पद की शपथ ले रहे थे। इतना ही नहीं कोर्ट की नजर में वो पिछले 8 साल से फरार थे।