पटना:
बिहार (Bihar) में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से मिले झटके बाद बिहार बीजेपी (BJP) मंगलवार को दिल्ली (Delhi) में सूबे की राजनीति को लेकर रणनीति तैयार करने पहुंची। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) मौजूद रहें। भाजपा की इस कोर ग्रुप की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बिहार में 2024 लोकसभा चुनाव में 35 से 40 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए बीजेपी छोटी पार्टियों को भी जोड़ने की कोशिश करेगी। बता दें कि बिहार में मंगलवार को नीतीश की नई कैबिनेट के विस्तार के बाद नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी कई सवाल उठने लगे है।

बैठक में लिए गए अहम फैसले
बिहार में भाजपा 'पोल खोल नीतीश कुमार' अभियान चलाएगी। शाह और नड्डा रैली भी करेंगे। इसमें बढ़ते अपराध के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा।
भाजपा टूटी हुई लोजपा को फिर से जोड़ने पर काम करेगी। चाचा पशुपति पारस और भतीजा चिराग पासवान को फिर से एक छत के नीचे लाया जाएगा।
भाजपा संगठन और सदन में नए चेहरे को लाने की तैयारी में है, जिससे नीतीश कुमार से सीधी लड़ाई लड़ी जाए। पार्टी अपरकास्ट पर विशेष फोकस करेगी।
कई नामों पर कयास
भाजपा संगठन और सदन में नए चेहरे को लेकर कई नेताओं के नाम पर कयास लगाए जा रहे हैं। इनमें बीजेपी विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा को इस पद पर बैठा सकती है। वैसे, सिन्हा अभी विधानसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन कहा जा रहा है, उनका हटना तय है। माना जा रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सिन्हा की छवि तर्कपूर्ण बयानों, धैर्यवान के रूप में उभरी है। कहा जा रहा है कि पिछले दिनों विधानसभा में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अध्यक्ष के बीच जो बहस हुई थी, उसमें भी विजय कुमार सिन्हा भारी नजर आ रहे थे। इधर, चर्चा नंदकिशोर यादव, प्रेम कुमार, अमरेन्द्र प्रताप सिंह और नितिन नवीन की भी है। इसमें कोई शक नहीं कि नितिन नवीन की छवि भी दमदार रही है।

बिहार को लेकर बीजेपी इतनी चितिंत क्यों
बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं। साथ ही यूपी, झारखंड और बंगाल बॉर्डर जुड़े होने की वजह से 10 और सीटों को यहां के मतदाता प्रभावित करते हैं। इसलिए बिहार को लेकर पॉलिटिकल पार्टियों का विशेष फोकस रहता है।